पिथौरागढ़ में ओलावृष्टि से फसलें तबाह, किसानों ने की मुआवजे की मांग
काली और गोरी नदी घाटी में हुई ओलावृष्टि से किसानों की दलहनी और फलदार फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं, ...और पढ़ें

फाइल फोटो
संवाद सहयोगी, जौलजीबी /तीतरी (पिथौरागढ़)। काली और गोरी नदी घाटी में नेपाल सीमा से लगे क्षेत्र में ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की गाढ़ी मेहनत पर पानी फेर दिया। विकासखंड कनालीछीना के ग्राम पंचायत तीतरी स्थित महल और धाप तोक में उड़द, सोयाबीन, गहत , लोबिया जैसी तैयार दलहनी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं।
मूली, प्याज और गोभी की पौध को भी भारी नुकसान पहुंचा है। धारचूला तहसील के जोलजीबी के दूतीबगड़ ग्राम सभा के औलापिपली तोक में फलों को भारी नुकसान हुआ है। प्रगतिशील काश्तकार सुनीता देवी के अनुसार उसके बगीचे में तैयार पपीता, अंगूर, अंजीर, लीची व अन्य फलदार पेड़ों को भारी क्षति पहुंची है।
कोलकाता से मंगाए गए मियाजाकी, थाई मैंगो और चाइना ऑरेंज के करीब 50 उन्नत पौधे भी ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गए, जिससे काश्तकार को भारी आर्थिक चपत लगी है। इसके अलावा सांवलीसेरा, बगड़ीहाट, जोग्यूड़ा, गर्जिया, चमलेख और अस्कोट क्षेत्र में भी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
प्रभावित काश्तकारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मौके पर टीम भेजकर नुकसान का त्वरित आकलन कराने तथा आपदा राहत कोष से मुआवजा देने की मांग की है।
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