आदि कैलास परिक्रमा रन 2.0 का भव्य शुभारंभ, 26 राज्यों के 1100 धावक ले रहे हिस्सा
व्यास घाटी में आदि कैलास परिक्रमा रन 2.0 का भव्य शुभारंभ हुआ, जिसमें 26 राज्यों के 1100 धावकों ने 70 और 42 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन में हिस्सा लिया।


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संवाद सूत्र , धारचूला (आदि कैलास) । व्यास घाटी स्थित आदि कैलास एवं गुंजी क्षेत्र में आदि कैलास परिक्रमा रन-2.0 का शुभारंभ शनिवार की सुबह हुआ। 70 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन को पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल और मुख्य विकास अधिकारी डॉ दीपक सैनी ने हरि झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अल्ट्रा मैराथन ज्योलिंगकांग से प्रारंभ हुई।
गूंजी से शुरू हुई 42 किलोमीटर वाली मैराथन को दर्जा राज्य मंत्री अशोक नबियाल और उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने हरि झंडी दिखाकर रवाना किया। धावकों ने नशा मुक्त समाज बनाने की शपथ भी ली। सुबह करीब 6:40 बजे आदि कैलास से 70 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन दौड़ शुरू हुई।
लगभग 4,500 मीटर की ऊंचाई पर आयोजित इस चुनौतीपूर्ण दौड़ में देशभर के धावक उत्साह के साथ प्रतिभाग कर रहे हैं। कम तापमान, कम ऑक्सीजन, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद धावकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
इस वर्ष मैराथन में देश के 26 राज्यों के लगभग 1,100 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। पिछले वर्ष आयोजित प्रथम संस्करण में करीब 750 धावकों ने हिस्सा लिया था। प्रतिभागियों की संख्या में हुई वृद्धि से आदि कैलास क्षेत्र में एडवेंचर टूरिज्म की बढ़ती लोकप्रियता और संभावनाएं प्रदर्शित हो रही हैं।
70 किलोमीटर की दौड़ आदि कैलाश से शुरू होकर छियालेख तक हुई
आयोजन के अंतर्गत 70 किलोमीटर की मुख्य मैराथन आदि कैलास से प्रारंभ होकर छियालेख तक जाएगी और गुंजी में समाप्त होगी। महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग आयु वर्गों में प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने किया धावकों का उत्साहवर्धन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए आयोजन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश क्षेत्र में आयोजित इस तरह के आयोजनों से उत्तराखंड की पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रदेश में आयोजित पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन में 22 राज्यों के धावकों ने प्रतिभाग किया था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस आयोजन का उल्लेख किया था, जिसके बाद क्षेत्र के प्रति पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आकर्षण बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का उद्देश्य है कि उत्तराखंड राज्य में पर्यटन को बढ़ाकर लोगों की आजीविका को समृद्ध किया जाए।
आदि कैलास परिक्रमा रन-2.0 के माध्यम से सीमांत क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, साहसिक पर्यटन की संभावनाओं और उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने का अवसर मिल रहा है। यह आयोजन स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ क्षेत्र की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चिप और सेंसर के डाटा वेरिफिकेशन के बाद घोषित होंगे 42 किमी दौड़ के नतीजे
गुंजी : सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र में आयोजित रोमांचक आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन 2.0' की 42 किलोमीटर लंबी मुख्य दौड़ अब अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुकी है। इस बार आयोजकों ने दौड़ के परिणामों में शत-प्रतिशत पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए पूरी व्यवस्था को हाईटेक कर दिया है।
आयोजन समिति के अनुसार, धावकों की सटीक टाइमिंग और लोकेशन पर पैनी नजर रखने के लिए पूरे मैराथन रूट पर जगह-जगह अत्याधुनिक सेंसर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, दौड़ में भाग ले रहे प्रत्येक धावक के जूते में एक विशेष माइक्रोचिप लगाई गई है। इस चिप और सेंसर नेटवर्क के माध्यम से हर प्रतिभागी की मूवमेंट का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
अत्यधिक ऊंचाई और कम ऑक्सीजन वाले इस बेहद चुनौतीपूर्ण ट्रैक पर 42 किमी की दूरी तय करना धावकों के लिए कड़ा इम्तिहान है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि दौड़ पूरी होने के बाद किसी भी तरह की मानवीय भूल या विवाद से बचने के लिए, चिप और सेंसर से प्राप्त डाटा का गहन वेरिफिकेशन किया जाएगा।
इस तकनीकी जांच के पूरी तरह संपन्न होने के बाद ही अंतिम विजेताओं की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। मैराथन में शामिल धावकों ने भी परिणामों के सटीक मूल्यांकन के लिए अपनाई गई इस पारदर्शी और उन्नत व्यवस्था की जमकर सराहना की है। की दौड़ गुजी से कुटी और फिर कुटी से गुं जी तक है|
