नेपाल सीमा पर झूलापुल बंद होने से फंसे 15 श्रद्धालु, एक घंटे बाद मिली वतन वापसी
महाअष्टमी पर नेपाल के मंदिरों से लौट रहे 15 भारतीय श्रद्धालु झूलापुल बंद होने से सीमा पर एक घंटे तक ...और पढ़ें
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समय कम है?
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जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़। शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर नेपाल के मंदिरों में दर्शन कर लौट रहे 15 भारतीय श्रद्धालु रविवार शाम झूलापुल बंद होने से सीमा पार ही फंस गए। नेपाल प्रशासन ने तो अपना गेट खोल दिया, लेकिन भारत की तरफ गेट बंद रहने से श्रद्धालुओं को अंतरराष्ट्रीय पुल पर ही करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
बाद में एसएसबी के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पुल खोला गया और जांच के बाद उन्हें भारत में प्रवेश मिल सका। दरअसल, नवरात्र के चलते बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु बैतड़ी, दार्चुला और डडेलधुरा (नेपाल) के मंदिरों में जात (मेले) में शामिल होने गए थे।
वापसी में देर होने के कारण श्रद्धालु शाम सात बजे सीमा पर पहुंचे, जबकि अंतरराष्ट्रीय झूलापुल शाम छह बजे ही बंद हो जाता है। नेपाल की तरफ फंसे लोगों ने नेपाली सशस्त्र बल से पुल खोलने का आग्रह किया और झूलाघाट व्यापार मंडल अध्यक्ष योगेश भट्ट व अमतड़ी के ग्राम प्रधान सुनील कुमार मेहरा को फोन पर सूचना दी।
नेपाल ने तो पुल खोल दिया, लेकिन भारत की तरफ गेट बंद रहा। व्यापार मंडल अध्यक्ष के अनुरोध पर एसएसबी कमांडर ने इंस्पेक्टर गोपाल सरकार को स्थिति से अवगत कराया। उच्चाधिकारियों से संपर्क कर अनुमति मिलने में करीब एक घंटा लग गया।
व्यापार मंडल अध्यक्ष योगेश भट्ट ने कहा कि दोनों देशों के बीच 'रोटी-बेटी' का संबंध है और नियमित समन्वय बैठकों के बावजूद एक घंटे तक श्रद्धालुओं का पुल पर फंसे रहना निराशाजनक है। वहीं, एसएसबी के इंस्पेक्टर गोपाल सरकार ने स्पष्ट किया कि शुरुआत में तीन श्रद्धालुओं के फंसे होने की सूचना थी, जो बाद में 15 हो गई।
सीमांत क्षेत्र में खराब नेटवर्क के कारण उच्चाधिकारियों से संपर्क करने और आदेश मिलने में समय लग गया। आदेश प्राप्त होते ही सभी 15 श्रद्धालुओं की सघन जांच कर उन्हें सुरक्षित भारत में प्रवेश दे दिया गया।
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