मिठाइयों के आकार में सुगंधित कैंडल और दीये बनाकर परिवार ने शुरू किया स्वरोजगार, लोगों के आकर्षण का केंद्र बने ये उत्पाद
श्रीनगर गढ़वाल में सुनील ढौंडियाल का परिवार अपनी भांजी कृति धस्माना की रचनात्मक सोच से प्रेरित होकर दीपावली के लिए ...और पढ़ें
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समय कम है?
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जागरण संवाददाता, श्रीनगर गढ़वाल। स्वरोजगार के लिए बड़े निवेश से ज्यादा जरूरी है नई सोच और उसे हकीकत में बदलने का हौसला, जिसे सुनील ढौंडि़याल और उनका परिवार साकार कर रहा है। उन्होंने, अपनी भांजी की रचनात्मक सोच को स्वरोजगार का रूप दिया है, जो धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगा है।
वे रोशनी के पर्व दीपावली के लिए घर पर ही काजू कतली, बूंदी के लड्डू और गोल गप्पे सहित अन्य मिठाईयों के आकार की सुगंधित कैंडल और दीये तैयार कर रहे हैं। दिल्ली और देहरादून से मिले आडर की सप्लाई भी समय पर पूरी की जा चुकी है।
अपर भक्तियाना स्थित आंचल डेयरी के समीप रहने वाले सुनील ढौंड़ियाल ने बताया कि गढ़वाल केंद्रीय विवि में स्नातक की पढ़ाई कर रही उनकी भांजी कृति धस्माना ने उन्हें स्वयं का काम शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उसने दीपावली पर कुछ अलग करने और सुगंधित कैंडल व दीये बनाने का सुझाव दिया।
इसके बाद 10 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से काम शुरू किया गया। वह, बाजार से कैंडल और दीये बनाने की सामग्री खरीदकर घर लाए और भांजी कृति के साथ उनकी पत्नी हिमानी एआई की मदद से आकर्षक डिजाइन तैयार में जुट गईं।
इस कार्य में उनका बेटा शांतनु भी सहयोग कर रहा है। उन्होंने अलग-अलग मिठाईयों, जिसमें काजू कतली, बूंदी के लड्डू, गोल गप्पे के साथ ही गुलाब के फूल, गेंदा के फूल, सूरजमुखी सहित अलग-अलग आकार के डिजाइन पंसद किए।
अब, इन्हीं आकारों में सुगंधित कैंडल और दीये तैयार किये जा रहे हैं। करीब एक माह में ही उन्हें दिल्ली व देहरादून से कैंडल व दीये के आडर भी मिल चुके हैं, जिनकी वे सप्लाई भी कर चुके हैं। दीपावली के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर भी आडर मिल रहे हैं।
साथ ही अन्य ग्राहकों के लिए अलग-अलग डिजायन में अलग-अगल दरों में कैंडल, दीये तैयार कर रहे हैं, जिससे सब लोग पूरे उत्साह व खुशी से दीपावली मना सके। सुनील ढौंड़ियाल ने बताया कि दस हजार रुपये में स्वरोजगार की यह पहल पूरे परिवार के साथ सकारात्मक साबित हो रही है।
दिल्ली व देहरादून से मिले आडर से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब, इस कार्य को चरणबद्ध तरीके से विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। साथ ही स्थानीय और अन्य क्षेत्रों मेंं कैंडल व दीये के कारोबार से जुड़े व्यवसायियों से भी संपर्क कर रहे हैं।
तकनीक से घर बैठे हो सकता स्वरोजगार: कृति
कृति धस्माना ने बताया कि तकनीक से केवल बड़े स्तर पर ही कारोबार नहीं किया जा सकता है। बल्कि इसकी मदद से घर बैठे भी स्वरोजार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
मेरे मन में आया कि दीपावली जैसे पर्व पर पारंपरिक दीये और कैंडल के साथ आधुनकिता को शामिल किया जाए। इसी सोच से मिठाईयों के आकार में सुगंधित कैंडल और दीये बनाने का विचार मन में आया और मामा-मामी से साझा किया।
एआई की मदद से अलग-अलग डिजायन देखे और जो पंसद आए उन्हें सपरिवार आकार देने में जुट गए। कृति ने बताया कि नई तकनीक, रचनात्मक सोच और पारिवारिक सहयोग से छोटी पूंजी से भी स्वरोजगार की अच्छी शुरूआत की जा सकती है।
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