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उत्तराखंड के पौड़ी में पांच साल की मासूम को उठा ले गया गुलदार, फूटा जनाक्रोश... विधायक की गाड़ी पर चढ़ी 'दादी'

Published: Wed, 04 Nov 2026 09:39 AM (IST)Updated: Wed, 04 Nov 2026 09:44 AM (IST)

पौड़ी के वजली गांव में एक गुलदार ने पांच साल की बच्ची आरुषि को घर के आंगन से उठाकर मार डाला, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया है।

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जागरण संवाददाता, पौड़ी। जिले के गढ़वाल वन प्रभाग में नागदेव रेंज स्थित वजली गांव में गुलदार ने पांच साल की मासूम को निवाला बना लिया है।

गुलदार घर के आंगन से स्वजनों के सामने ही मासूम का उठा ले गया। जिसके बाद पूरे क्षेत्र के लोगों ने गुलदार का पीछा किया। जहां कुछ दूर झाड़ियों में गुलदार मासूम का छोड़कर भाग गया। ग्रामीणों काे मासूम का शव बरामद हो गया है। घटना के बाद वन मंत्री, विधायक व सरकार के खिलाफ जनाक्रोश फूट पड़ा है।

डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने बताया कि वजली गांव में कृष्ण कुमार व बबीता देवी की पांच वर्षीय बेटी स्वजनों के सामने घर के आंगन में खेल रही थी। शाम करीब सवा छह बजे गुलदार मासूम को उठा ले गया। बताया कि गुलदार के हमले में पांच वर्षीय मासूम आरुषि की मौत हो गई है।

घटना की सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। वन विभाग की टीम मौके पर है। साथ ही गुलदार को आदमखोर घोषित किए जाने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र भेज दिया गया है।

कुछ माह पहले गई थी ननिहाल

पौड़ी: गुलदार के हमले में जान गंवाने वाली मासूम आरुषी कास खंड पौड़ी के मल्ली गांव की रहने वाली है। वह अपनी मां बबीता के साथ कुछ माह पहले ननिहाल आई थी। मल्ली निवासी व मासूम के ताऊ शोभराज व ग्रामीण सुरेंद्र ने बताया कि मासूम आरुषी की अटखेलियां आंखों में तैर रही है। वह अपने माता-पिता की लाडली थी। पिता कृष्ण कुमार मजदूरी कर परिवार का लालन पालन करता है। जबकि मां बबीता देवी गृहणी हैं।

सरकारी सिस्टम के प्रति गुस्सा

पहाड़ के गांवों में अब गुलदार का खौफ ही नहीं, सरकारी सिस्टम के प्रति गुस्सा भी घर कर चुका है। खांड्यूंसैंड में गुलदार के हमले में मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया। घर में मासूम की मौत का मातम था, लेकिन बाहर सड़कों पर व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा उबल रहा था।

ग्रामीणों ने वन विभाग और शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ‘वन मंत्री पौड़ी आओ’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। ग्रामीणों का आक्रोश साफ संदेश दे रहा था कि अब खोखले आश्वासनों और औपचारिक दौरों से काम नहीं चलेगा।

पौड़ी वजली गांव में मासूम को गुलदार द्वारा निवाला बनाए जाने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। खांड्यूसैंण में ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर विधायक के वाहन का घेर लिया। इस दौरान प्रदर्शन को देखते हुए विधायक वाहन से बाहर नहीं आए। लेकिन ग्रामीणों ने चारों ओर से वाहन को घेर लिया। हालात यह हो गए कि एक बुजुर्ग महिला विधायक के वाहन के बाेनट पर चढ़कर प्रदर्शन करने लगी। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता विनोद

दनोसी, मोहित सिंह, श्रीकांत व अन्य ने कहा कि जब पौड़ी जनपद में गुलदार लगातार इंसानी जिंदगी पर हमला कर रहे हैं, मासूम बच्चे हो, बुजुर्ग हो या महिला कोई सुरक्षित नहीं हैं। तब वन मंत्री कहां हैं? आखिर उन्हें पौड़ी पहुंचकर ग्रामीणों का दर्द सुनने और जमीनी हकीकत देखने की जरूरत क्यों महसूस नहीं हुई? क्या पहाड़ के गांवों की जिंदगी और यहां के बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है या नहीं? 

उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के हमलों में जान गंवाने वाले लोग केवल सरकारी आंकड़े नहीं, किसी परिवार की दुनिया होते हैं। लेकिन हर घटना के बाद कुछ दिन की हलचल और आश्वासन के बाद व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौट आती है। घटना के बाद यहां पहुंचे विधायक पौड़ी राजकुमार पोरी को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों का कहना था कि जनप्रतिनिधियों को केवल हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचकर संवेदना जताने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब गांवों में लगातार खतरा बना हुआ है तो पहले से सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? शासन और वन विभाग आखिर किस बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं? इस अवसर पर एसडीएम सदर गौरी प्रभात, एसडीओ आयशा बिष्ट, कोतवाल पौड़ी जयपाल नेगी, एसएसआई राजविक्रम सिंह पंवार आदि मौजूद रहे।

मौत के बाद जागने वाली व्यवस्था से कब मिलेगी मुक्ति

पौड़ी: ग्रामीणों का आक्रोश किसी एक दिन या एक घटना का नतीजा नहीं है। गुलदार की बढ़ती सक्रियता ने गांवों की दिनचर्या तक बदल दी है। शाम होते ही रास्ते सुनसान हो जाते हैं। बच्चों को अकेले बाहर भेजना जोखिम भरा हो गया है। महिलाओं और बुजुर्गों को घर के आसपास भी सतर्क रहना पड़ता है।

खेती, पशुपालन और रोजमर्रा के कामों के लिए निकलना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब आबादी के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी और हमलों की आशंका लगातार बनी हुई है तो वन विभाग की निगरानी और रोकथाम के इंतजाम इतने कमजोर क्यों हैं?

अब आश्वासन नहीं, जवाब और कार्रवाई चाहिए

पौड़ी: ग्रामीणों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल से तत्काल पौड़ी पहुंचकर प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने और जनता के सवालों का जवाब देने की मांग की। साथ ही गुलदार की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी, संवेदनशील गांवों में वन विभाग की टीमें तैनात करने, नियमित गश्त, तत्काल प्रतिक्रिया दल और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई।

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