हल्द्वानी, जेएनएन : गाैला बैराज के समीप से जलसंस्थान को पेयजल जलापूर्ति के लिए बनाया गया अस्थायी बंधा बहने से हल्‍द्वानी शहर की ढाई लाख की आबादी प्रभावित हो चुकी है। जलापूर्ति ठप होने का पहला दिन होने व मौसम में अधिक गर्मी नहीं होने से बुधवार को पानी के लिए मारामारी की स्थिति नहीं बनी। अलबत्ता गुरुवार को बड़ी आबादी तक पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करना विभाग के लिए चुनौती बन चुका है। पूरे दिन जलसंस्थान के अफसर पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए योजना बनाते रहे। कई नलकूपों का पानी डाइवर्ट करने के साथ ही 19 टैंकरों से गुरुवार को पानी बांटा जाएगा।

पहाड़ों पर भारी बरसात से मंगलवार को गौला नदी का जलस्तर 7700 क्यूसेक पार हो गया था। इससे बैराज से पहले जलसंस्थान की नहर के पास बनाया गया अस्थायी बंधा बह गया। बंधा बहने से मंगलवार शाम से शहर को जलापूर्ति ठप हो गयी। इस बंधे के निर्माण में काम शुरू होने के बाद कम से कम पांच दिन का समय लगना है, तब तक शहर की बड़ी आबादी के सामने पानी का संकट बना रहेगा। गौला नदी से जलसंस्थान रोजाना 30 एमएलडी यानि तीन करोड़ लीटर पानी लेता है, जो ढाई लाख से अधिक आबादी की प्यास बुझाने के साथ ही अन्य कामों के लिए प्रयोग होता है।

इधर जलसंस्थान के अफसर पूरे दिन शहरवासियों को पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कराने के लिए रणनीति तैयार करते रहे। नलकूपों का पानी किन-किन इलाकों में डाइवर्ट किया जाएगा। किस तरह से रोस्टर बनाकर पानी बांटा जाएगा। टैंकर किस हिसाब से क्षेत्र में भेजे जाएंगे, अफसर देर शाम तक इसी पर मंथन करते रहे। जलसंस्थान के अधिशासी अभियंता विशाल कुमार ने बताया कि शहर को पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कराने की योजना तैयार कर ली गयी है। नलकूप से जिन इलाकों में पानी नहीं पहुंच पाएगा। वहां टैंकरों से आपूर्ति करायी जाएगी। इसके लिए विभाग के साथ ही निजी टैंकर मंगा लिए गए हैं। गुरुवार को 19 टैंकर दिनभर पानी बांटेंगे। अगर जरूरत पड़ी को पानी बांटने के लिए टैंकरों की संख्या को और अधिक बढ़ाया जाएगा।

 

दूसरे दिन भी नहीं शुरू हो सका बंधा निर्माण

मंगलवार की बरसात से गौला में आए 7700 क्यूसेक पानी से बहा अस्थायी बंधे का पुनर्निर्माण दूसरे दिन भी शुरू नहीं हो पाया। सिचांई विभाग के रिकार्ड के मुताबिक बुधवार की सुबह 87एमएम बरसात दर्ज की गयी। मंगलवार शाम छह बजे से पानी का जलस्तर घटना शुरू हुआ था। बुधवार सुबह पांच बजे नदी का जलस्तर 1400 क्यूसेक व शाम पांच बजे घटकर 695 क्यूसेक दर्ज किया गया। वहीं पानी के बहाव से बही पॉकलैंड मशीन दूसरे दिन भी जलस्तर अधिक होने से नहीं निकाली जा सकी। अलबत्ता दूसरी मशीन बनाकर नदी में जाने के लिए किनारे से रास्ता बनाना शुरू किया गया है। जलस्तर चार सौ क्यूसेक से कम होने पर नदी में रास्ता बनाने व बंधा निर्माण शुरू किया जाएगा।

 

नहर के मुहाने के साथ जगह-जगह फंसा मलबा हटाया

नदी में बरसात के पानी के साथ ही भारी मात्रा में सिल्ट आने से बैराज से जलसंस्थान को जाने वाली नहर के मुहाने के अलावा कई स्थानों में भारी मलबा जमा हो गया था। सिंचाई विभाग के अफसरों ने दिनभर बैराज में रहकर नहर के मुहाने व अन्य स्थानों पर जमा मलबा हटाया। अफसरों के मुताबिक दूसरे दिन भी बरसात से पानी के साथ मलबा आ रहा था। अलबत्ता कर्मचारी व श्रमिक लगातार नहर की सफाई करने में दिनभर जुटे रहे। अगर गुरुवार तक नदी का जलस्तर चार सौ क्यूसेक से कम हुआ तो बंधा निर्माण के साथ ही जलसंस्थान की नहर में पानी की आपूर्ति करने के प्रयास किए जाएंगे।

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Edited By: Skand Shukla