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जागरण विमर्शः बदलती जरूरतों और चुनौतियाें के बीच विकास पथ पर बढ़ा उत्तराखंड: सीएम धामी

Published: Fri, 25 Sep 2026 10:16 PM (IST)

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जागरण विमर्श में उत्तराखंड के 26 वर्षों के विकास पथ पर प्रकाश डाला, जिसमें बजट ...और पढ़ें

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सुमित जोशी जागरण, हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के समय में उत्तराखंड एक सीमांत हो जाता था। पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और चमोली क्षेत्र में पोस्टिंग पर अधिकारी मानते थे कि जबरन भेजा जा रहा है।

बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सेवाएं सुगम नहीं थीं, लेकिन 26 वर्षों के सफर में उत्तराखंड विकास पथ पर आगे बढ़ा है। समय के साथ जरूरतें और चुनौतियां जरूर बदली हैं, मगर राज्य में सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

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जगह-जगह अस्पताल खुले हैं, नई परियोजनाएं भी प्रारंभ की गई है, प्रत्येक गांव तक बिजली पहुंची और सड़कों का जाल भी बिछा है। आज स्थिति ये कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून जैसे कई कड़े निर्णयों से आज देवभूमि पूरे देश में नजीर पेश कर रही है। अन्य प्रांत यहां के माडल को अपना रहे हैं।

शुक्रवार को होटल फार्च्यून में आयोजित उत्तराखंड : आशाएं और चुनौतियां विषय पर आयोजित जागरण विमर्श सीएम पुष्कर सिंह धामी से समाचार संपादक विजय यादव ने संवाद किया। राज्य के गठन के समय लोगों की आकांक्षाएं के अनुरूप राज्य के विकास को लेकर आने वाली चुनौतियों के सवाल पर सीएम ने कहा कि स्थापना के समय राज्य का प्रारंभिक बजट 4000 करोड़ रुपये था, लेकिन आज बजट 1.11 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है।

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प्रतिव्यक्ति आय में भी 41 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। आज बिजली परियोजनाएं आगे बढ़ने के साथ ही उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। कृषि क्षेत्र विस्तार ले रहा है और बागवानी में भी नए काम शुरू हुए हैं। सगंध क्षेत्र में उत्तराखंड में बने केमिकल रहित सेंट की डिमांड काफी है।

हाउस आफ हिमालया के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से बनाए गए उत्पाद स्वाद और गुणवत्ता के मामले में नीमा कंपनियों के प्रोडक्टों को भी मात दे रहे हैं। अनियोजित विकास को सीएम ने एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार किया और कहा कि धारण क्षमता का आकलन करने का काम शुरुआत किया गया है।

कौन सा क्षेत्र कितना दबाव झेल सकता है इसे देखा जा रहा है। यहां धारण क्षमता पूरी हो गई है वहां रोकना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने इकोलाजी और इकोनामी दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक होने की बात कही।

विकास कार्यों के लिए वन क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में यह आसान और कुछ मिनट की चर्चा नहीं है, बल्कि मंथन किया जाना जरूरी है। इसे देखते हुए सरकार स्तर पर ग्लेशियरों की मैपिंग का काम करवाने की बात कही है।

चार धाम में सुविधाएं बढ़ाने का हो रहा काम, बढ़ रहे श्रद्धालु

सीएम धामी ने कहा कि चार धामों में सुविधाएं बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है। सुविधाओं में विस्तार होने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। हर साल रिकार्ड टूट रहे हैं। इस वर्ष अभी तक 52 लाख से अधिक लोग चार धामों की यात्रा कर चुके हैं।

कांवड़ यात्रा में पांच करोड़ लोग आए हैं और पूर्णागिरि में तीन महीने में करीब 20 लाख लोग पहुंचे हैं। कैंची धाम में रोजाना 25-30 हजार भक्त पहुंच रहे हैं। सीएम ने बताया कि जागेश्वर धाम के लिए मास्टर प्लान बनाया है और काम चल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में शीतकालीन यात्रा शुरू करने की बात कहते हुए कहा कि इसका परिणाम हुआ कि अब 12 महीने यात्रा चल रही है। इससे लोगों को वर्षभर रोजगार मिल रहा है।

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