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विकसित उत्तराखंड 2047 विजन डॉक्यूमेंट अगले माह होगा जारी प्रति व्यक्ति आय 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य

Published: Fri, 25 Sep 2026 11:05 PM (IST)

प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने जागरण विमर्श में बताया कि अगले महीने 'विकसित उत्तराखंड 2047' विजन डॉक्यूमेंट जारी होगा। ...और पढ़ें

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ललित मोहन बेलवाल, जागरण हल्द्वानी। नियोजित विकास के माध्यम से ही उत्तराखंड विकसित राज्यों की श्रेणी में आ सकता है। इसके लिए अगले महीने विकसित उत्तराखंड 2047 का विजन डाक्यूमेंट जारी किया जाएगा। इसके बाद तीन चरणों में रोडमैप बनाया जाएगा।

इसका उद्देश्य अगले 21 वर्षों में राज्य की प्रतिव्यक्ति आय को 10 गुना और जीएसडीपी को सात गुना से ज्यादा बढ़ाना है। ये बातें जागरण विमर्श में राज्य के नियोजन एवं ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव डा. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहीं।

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शुक्रवार को नैनीताल रोड स्थित होटल आइटीसी फार्च्यून में आयोजित जागरण विमर्श के चौथे सत्र में दैनिक जागरण के चीफ सब एडिटर शमशेर नेगी और सीनियर रिपोर्टर गोविंद बिष्ट ने नियोजित विकास विषय पर प्रमुख सचिव से संवाद किया।

उनके एक सवाल के जवाब में प्रमुख सचिव ने दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कारिडोर को नियोजित विकास का उदाहरण बताया, जहां से वन्यजीव बेरोकटोक आवाजाही कर पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने अलग प्रदेश बनने के बाद तेजी से विकास किया है। प्रदेश ने देश में होम स्टे योजना को माडल के तौर पर पेश किया है। यह वजह है कि पर्यटक नैनीताल, मसूरी तक सीमित नहीं रहे हैं। अब वे प्रदेश के हर स्थल पर जा रहे हैं।

उत्तराखंड में है दूसरे राज्यों को बिजली बेचने की क्षमता

उन्होंने कहा कि अगर उत्तराखंड हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों पर पूरी क्षमता के साथ काम करता है तो यह दूसरे राज्यों को बिजली बेचकर राजस्व अर्जित कर सकता है। लेकिन, इनका विरोध भी है, इसी वजह से भागीरथी घाटी में सभी पावर प्रोजेक्ट बंद किए गए।

अलकनंदा के पावर प्रोजेक्ट भी अदालत में विचाराधीन हैं। हालांकि यमुना नदी में लखवाड़ और किसाऊ बांध बन रहे हैं। चूंकि ये बांध क्लीन एनर्जी बनाते हैं इसलिए इनका विरोध नहीं करना चाहिए।

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तो 2010 में डूब जाता हरिद्वार

प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में आज तक बांध के चलते कोई आपदा नहीं आई है बल्कि 2010 में टिहरी बांध के चलते हरिद्वार डूबने से बच गया। उन्होंने बताया कि उस साल एक शाम भागीरथी और अलकनंदा घाटी में बेतहाशा बारिश हुई। अलर्ट भेजा गया कि हरिद्वार में 100 वर्षों में अधिकतम पानी पहुंचेगा। तब टिहरी बांध में भागीरथी नदी का पानी रोका और पहले अलकनंदा नदी का पानी जाने दिया। इसके बाद भागीरथी के पानी को हरिद्वार की ओर भेजा।

बड़ी सड़कों में होने चाहिए टनल और ब्रिज

उन्होंने बड़ी लाइफलाइन रोड को टनल और ब्रिज से बनाने का पक्ष लिया। उन्होंने बताया कि इससे न सिर्फ समय कम होगा बल्कि जगह-जगह पहाड़ काटने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इनसे आपदा के समय रेस्क्यू टीमों को भी पहुंचने में तेजी आती है।

विकास कार्यों में सामरिक संवेदनशीलता सबसे ज्यादा जरूरी

प्रमुख सचिव ने सड़कों के सामरिक महत्व को बताते हुए बताया कि वे 2006 से 2008 के बीच जब उत्तरकाशी में डीएम थे तब भारतीय सेना की मंशा थी कि भारत की ओर भी सीमा तक सड़कें बन जाएं, क्योंकि चीन तेजी से अपनी ओर विकास कर रहा था।

चूंकि वहां नेशनल पार्क के अंदर भी सड़कें बननी थी तो सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एंपावर्ड समिति ने वहां निरीक्षण किया और माउंटेन गोट को बचाने का हवाला देकर सड़क बनाने के पक्ष में फैसला नहीं लिया।

प्रमुख सचिव बताते हैं कि तब उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि अगर आपने यहां सड़क नहीं बनाने दी तो हो सकता है, चीनी घुसपैठ में न यह जगह बचेगी और न वो माउंटेन गोट। इसलिए जहां सामरिक संवेदनशीलता होती है वहां अन्य संवेदनशीलता को नजरअंदाज करना पड़ता है।

दुर्भाग्य से एक विभाग दूसरे को नहीं देता जमीन

लैंड बैंक से जुड़े सवाल पर उन्होंने बताया कि सरकार के पास काफी जमीन है, लेकिन दुर्भाग्य से एक विभाग दूसरे को जमीन नहीं देता है। वे उसे निजी जमीन की तरह प्रोटेक्ट करते हैं। इसके समाधान के लिए 2022 में आप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमिटी बनाई गई। इससे अब कई मुद्दे सुलझ रहे हैं।

तीन महीने में खुल जाएगा कैंची धाम बायपास

उन्होंने बताया कि लगभग तीन महीने में कैंची धाम बायपास खुल जाएगा। जिन्हें अल्मोड़ा, रानीखेत जाना है, वे इससे निर्बाध रूप से निकल सकते हैं। इसके अलावा पर्यटकों की सहूलियत के लिए कैंची धाम तक रोपवे भी बनाया जा रहा है।

ऋषिकेश में पर्यटक प्रतिदिन महज 20 डालर करते हैं खर्च

उन्होंने बताया कि ज्यादा पर्यटकों का आना अच्छे पर्यटक स्थल होने का प्रमाण नहीं है, बल्कि ऐसे पर्यटक आएं जो उस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में योगदान दें। अगर उनका प्रतिदिन खर्च कम है तो उनके आने से फायदे की जगह नुकसान होता है।

सरकार को उनके लिए खर्च करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक ऋषिकेश में आते हैं, लेकिन उनका प्रतिदिन खर्च 20 डालर है, जबकि कोई भारतीय यूरोप जाता है तो उनका प्रतिदिन खर्च 200 डालर है। इसकी एक वजह यह भी है कि हमारे पास गुणवत्ता पूर्ण आवास नहीं हैं।

पर्यटन स्थलों की धारण क्षमता का आकलन शुरू

उन्होंने बताया कि सरकार में पर्यटन स्थलों की धारण क्षमता का आकलन शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि सरकार गोमुख ग्लेशियर, फूलों की घाटी जैसे पर्यटन स्थलों में अब सीमित लोगों को ही भेज रही है।

अवैध निर्माण पर विकास प्राधिकरण का नियंत्रण नहीं

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में विकास प्राधिकरण का अवैध निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है, लेकिन जहां ये नहीं हैं, वहां स्थिति और भी बुरी है। इसके लिए कानून को भी प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि जिम्मेदारों की भी जवाबदेही हो।

मलबे की निगरानी वन विभाग की जिम्मेदारी

उन्होंने बताया कि जहां बड़े प्रोजेक्ट के तहत काम होते हैं, वहां मलबे के निस्तारण की निगरानी करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था से लेकर वन विभाग की है। इसके साथ ही आम लोगों को भी इसके लिए जागरूक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के लिए विकास कार्य नहीं बल्कि वनाग्नि घातक है।

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