बागेश्वर, जेएनएन : उत्तराखंड सरकार बिहार के मजदूरों को उनके घर भेजने की योजना बना रही है। यदि कुमाऊं मंडल के सभी जिलों से 1200 से अधिक मजदूर घर लौटने के लिए आवेदन करते हैं तो उनके लिए पेड ट्रेन की व्यवस्था की जाएगी। शासन से जारी एडवाइजरी के बाद सभी जिलों डीएम ने तहसीलों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि संकट की इस घड़ी में मजदूरों से टिकट का पैसा लेने की बात लोगों को अखर रही है। लोगों का कहना है कि किराया या तो राज्य सरकारें दें या फिर केन्द्र सरकार वहन करे। 

कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए तीसरे लॉकडाउन की अवधि आज खत्म हो रही है। ऐसे में लंबे समय से उत्तराखंड में फंसे मजदूरों के पास बची-खुची रकम खत्म हो गई है। उनके सामने रोजी रोटी का संकट हो गया है। सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के सहयोग से उन्हें भोजन उपलब्ध कराने के साथ राशन किट दिया जा रहा है। ऐसे में अब वे काम करने की बजाए अपने घर लौटना चाहते हैं।

सरकार लौटने की इच्छा रखने वाले मजदूरों के वापसी की योजना बना रही है। अब उनकी घर वापसी का समय आ गया है। सरकार ने कुमाऊं के बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा आदि जिलों में काम करने वाले बिहार के मजदूरों की घर वापसी का रास्ता खोल दिया है। शासन से प्राप्त एडवाइजरी के अनुसार डीएम भी सक्रिय हो गए है।

 

एडवाजरी के अनुसार घर वापसी का सपना संजोए बैठे मजदूरों को आवेदन करना है। कुमाऊं परिक्षेत्र से यदि 1200 से लेकर 1500 तक मजदूरों ने घर जाने के लिए आवेदन किया तो उनके लिए काठगोदाम से स्पेशल ट्रेन लगाई जा सकती है। रंजना राजगुरु डीएम, बागेश्वर ने बताया कि सरकार बिहार के मजदूरों की घर वापसी के लिए स्पेशल ट्रेन लगाएगी। यदि कुमाऊं में 1200-1500 के बीज मजदूर आवेदन करते हैं तो उनके लिए पेड ट्रेन चलाई जाएगी।

 

लाखों रुपये खर्च कर पहुंच रहे घर वर्तमान में उप्र. बिहार और अन्य राज्यों के लोग पास बनाकर प्राइवेट वाहनों से घर जा रहे हैं। जिसमें उन्हें लाखों रुपये व्यय करने पड़ रहे हैं। लेकिन अब सरकार ऐसे मजदूरों के लिए पेड ट्रेन चला रही है। वह सिर्फ दो से तीन हजार रुपये के खर्च पर अपने घर पहुंच सकेंगे।

 

बागेश्वर जिले में यहां आठ सौ से अधिक मजदूर

बागेश्वर जिलेगरुड़, कपकोट, कांडा, काफलीगैर तहसीलों में आठ सौ से अधिक बिहार के मजदूर काम करते हैं।हालांकि लॉकडाउन तीसरे में उन्हें काम मिलने लगा है। लेकिन कई मजदूर घर जाने के लिए तैयार हैं। ऐसे ही अन्य जिलों के हालत भी हैं। बिहारी के मजदूर रोहित कुमार, विशन महतो, बृज किशोर, सूरज कुमार ने कहा कि वह पिछले डेढ़ माह से घर जाने का इंतजार कर रहे हैं।

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