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जागरण विमर्शः उत्तराखंड में कृषि बागवानी से स्वरोजगार की राहेंः प्रो अजय कुमार

Published: Fri, 25 Sep 2026 08:42 PM (IST)

प्रो. अजय कुमार ने 'जागरण विमर्श' में बताया कि अगले 10 वर्षों में उत्तराखंड में कृषि, बागवानी और हर्बल मेडिसिन ...और पढ़ें

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चंद्रशेखर द्विवेदी, अल्मोड़ा। उत्तराखंड: आशाएं और चुनौतियां विषय पर आयोजित जागरण विमर्श में भौतिकी के प्रो. अजय कुमार ने कहा कि आने वाले 10 वर्ष फूड और एग्रीकल्चर इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण हैं। उत्तराखंड में कृषि, बागवानी और हर्बल मेडिसिन के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं।

जरूरत इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध ढंग से काम करने और युवाओं को बाजार की जरूरत के अनुरूप कौशल देने की है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों की अपनी सीमा है। ऐसे में स्वरोजगार, उद्यम और स्थानीय संसाधनों पर आधारित कारोबार को बढ़ावा देना जरूरी है।

प्रो. अजय ने कहा कि कुमाऊं और गढ़वाल प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र हैं। यहां जलस्रोत, कृषि भूमि, विभिन्न जलवायु और फूलों की विविधता मौजूद है। विकास की नीतियां बाहर से थोपने के बजाय स्थानीय लोगों के अनुभव और विशेषज्ञों के विमर्श के आधार पर तैयार होनी चाहिए।

कृषि और बागवानी को कम उत्पादकता वाला परंपरागत काम मानने के बजाय इसे बड़े स्टार्टअप क्षेत्र के रूप में देखने की जरूरत है।
छोटे खेतों के लिए सहकारी खेती और साझा मशीनरी जरूरी है।

प्रो. अजय कुमार ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेत छोटे हैं, इसलिए व्यक्तिगत स्तर पर महंगी मशीनरी खरीदना व्यावहारिक नहीं है। 20 गांवों के समूह के लिए ट्रैक्टर, थ्रेशर और सिंचाई उपकरण जैसी साझा मशीनरी उपलब्ध कराई जा सकती है।

सहकारी खेती, मिश्रित फसल, फूलों की खेती, ड्रिप सिंचाई और यंत्रीकृत कृषि को बढ़ावा देकर लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के फूलों की गुणवत्ता अच्छी है।

फूलों का उपयोग पूजा और शुभ कार्यों के अलावा सुगंध तथा अन्य उत्पाद तैयार करने में किया जा सकता है। इसी तरह स्थानीय जड़ी-बूटियों और हर्बल उत्पादों को बाजार से जोड़कर युवाओं के लिए नए उद्यम खड़े किए जा सकते हैं। डेयरी उत्पादों को भी उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।


सवाल-जवाब में रोजगार और कौशल पर चर्चा

प्रश्न: उत्तराखंड में सरकारी नौकरी सीमित है। स्वरोजगार के लिए किन क्षेत्रों में अधिक संभावना है?

उत्तर: कृषि, बागवानी, फूड प्रोसेसिंग, फ्लोरीकल्चर, डेयरी और हर्बल मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक, बाजार और प्रशिक्षण से जोड़ना होगा।

प्रश्न: कौशल विकास सिर्फ कारपेंटर और इलेक्ट्रिशियन जैसे परंपरागत कामों तक सीमित क्यों है, क्या सरकार स्किल डेवलपमेंट के कार्य में फेल हुई है?

उत्तर: प्रो. अजय कुमार ने कहा कि कौशल विकास को लेकर प्रभावी संचार की कमी रही है। कला वर्ग के विद्यार्थियों सहित स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। राज्य में आइआइएम जैसे संस्थान हैं, लेकिन कृषि प्रबंधन और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमिता की शिक्षा को भी विस्तार देने की जरूरत है।

प्रश्न: क्या कौशल हासिल करने के लिए बहुत अधिक शैक्षणिक योग्यता जरूरी है?

उत्तर: उन्होंने कहा कि कौशल के लिए अत्यधिक शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उपलब्ध मानव संसाधन को उत्पादक संसाधन में बदला जाए। इसके लिए प्रशिक्षण, तकनीक, वित्त और बाजार को एक साथ जोड़ना होगा।

प्रश्न: गांवों में दूध-दही का उत्पादन घट रहा है और बाजार आने के बावजूद ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा।

उत्तर: प्रो. अजय कुमार ने डेयरी उत्पादों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दूध और उससे बने उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं। स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार के बीच प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने के बजाय अपनी क्षमता पहचानकर उद्यम की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। स्थानीय संसाधनों को संरक्षित करते हुए उनका वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपयोग किया जाए तो उत्तराखंड के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

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