दैनिक जागरण की विचार गोष्ठी, वक्ता बोले, महंगाई, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दों के समाधान से आएगा देश में सच्चा राष्ट्रवाद
दैनिक जागरण ने नैनीताल में विचार गोष्ठी आयोजित की, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि सच्चा राष्ट्रवाद महंगाई, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों के समाधान से ही स्थापित होगा।
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जागरण संवाददाता, नैनीताल। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में लोकतंत्र और राष्ट्रवाद की मूल अवधारणाएं देश के दूर-दराज के गांवों और आम नागरिकों तक लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं पहुंचाना, शिक्षा प्रदान करना, गरीबी और भुखमरी मिटाना तथा राजनीतिक जागरूकता फैलाना था, जो पूरी तरह साकार नहीं हो पाई हैं।
राजनीति और सत्ता में मौजूद लोगों ने अपने अवसरवाद के कारण राष्ट्रवाद की मूल अवधारणा को तोड़-मरोड़ कर अलग रूप में पेश करना शुरू कर दिया। जिस बड़े तबके ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी, वह वर्ग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

सच्चा राष्ट्रवाद तभी स्थापित होगा, जब समाज की विडंबनाओं, महंगाई, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे प्राथमिक मुद्दों का समाधान किया जाएगा।
यह विचार दैनिक जागरण की ओर से सोमवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर हिन्दी विभाग के सहयोग से आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि दैनिक जागरण दूर-दराज़ के लोगों और समाज की आवाज बनकर इन बुनियादी मुद्दों को उठाता है। दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक स्व. नरेंद्र मोहन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके हिन्दुत्व, राष्ट्रवाद, भाषा, संस्कृति, राष्ट्रीयता और पत्रकारिता में योगदान को याद किया।
साथ ही दैनिक जागरण की ओर से चलाई जा रही विचार गोष्ठी की श्रृंखला को श्रेष्ठ और आवश्यक बताया। दैनिक जागरण का अभियान भविष्य की दिशा व दशा बचाने का मुख्य आधार
हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में दैनिक जागरण के बिना चर्चा अधूरी और अस्वाभाविक लगेगी। दैनिक जागरण का यह अभियान हिंदी भाषा के उद्भव, विकास और उसके भविष्य की दिशा व दशा को बचाए रखने का एक मुख्य आधार है।
पत्रकारिता का अर्थ पत्र के माध्यम से अपनी और राष्ट्र की बात दूसरों तक पहुंचाना है। इसके लिए भाषा सबसे महत्वपूर्ण है। आज के वैश्वीकरण और नई शिक्षा नीति के संदर्भ में, हिंदी केवल भारत तक सीमित नहीं है। हमें बहुभाषी होना पड़ेगा और हिंदी के साथ-साथ अन्य भाषाओं के विकल्प भी रखने होंगे।
संस्कृति से जुड़ने और अपनी जड़ों को थामे रखने का मुख्य माध्यम भाषा ही है। भाषा केवल बोलचाल का साधन नहीं है, बल्कि यह अर्जित की जाती है। शब्द की केवल ''उत्पत्ति'' नहीं, बल्कि ''व्युत्पत्ति'' होती है।
समाचार पत्रों में शीर्षक पाठक को आकर्षित करते हैं और संपादकीय पृष्ठ किसी भी समाचार पत्र का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। संपादकीय हमें गहराई में ले जाकर भारतीयता, राष्ट्रीयता और हिंदुत्व के मूल भाव को समझाता है।
भाषा नहीं होती एक दूसरे की प्रतिद्वंद्वी
भाषा केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह पूरे व्यक्तित्व, व्यवहार और पहचान का आधार है। अपनी लोक भाषा जैसे कुमाऊंनी को बोलने में झिझकना अपनी संस्कृति और पहचान को भूलने जैसा है। कोई भी भाषा एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी नहीं होती।
जितनी अधिक भाषाएं सीखेंगे, उतनी ही अधिक संस्कृतियों और ज्ञान को समझ पाएंगे। हिंदी को केवल एक भाषा न समझें, यह आपकी पहचान और व्यवहार का हिस्सा है। अधिक से अधिक समाचार पत्र पढ़ें ताकि आपका शब्द भंडार और चेतना बढ़े। शिक्षित होने के साथ-साथ चेतनशील बनना अधिक आवश्यक है।
प्राचीन समय में धन की कमी के कारण लोग एक-एक दाना या टिक्की जोड़कर पौंची और गलोबंद जैसे आभूषण बनाते थे, जो आज धरोहर और पूंजी के रूप में स्थित हैं। आधुनिकता और पाश्चात्य प्रभाव के साथ संस्कृति में परिवर्तन स्वाभाविक है; यदि परिवर्तन से संस्कृति ऊंचाई पर पहुंचती हैं, तो उसे स्वीकार करना चाहिए।
लोक संस्कृति समाज की साझा धरोहर और अभिव्यक्ति है जो हमारी पहचान और जड़ों को मजबूत बनाती है। अपनी भाषा और संस्कृति को बचाना और सम्मान देना सभी का सामूहिक दायित्व है।
गोष्ठी में प्रभारी डीन प्रो. प्रीति, डा. शशि पाण्डे, डा. दीक्षा मेहरा ने विचार रखे। इस मौके पर डा. नेत्रपाल शर्मा, डा. पंकज भट्ट, डा. मोहित रौतेला सहित हिन्दी व जंतु विज्ञान विभाग के छात्र-छात्राएं-शोधार्थी मौजूद रहे।
दस अक्टूबर तक जारी रहेगा विचार गोष्ठी का क्रम
नैनीताल: दैनिक जागरण के पूर्व प्रबंध संपादक स्व. नरेंद्र मोहन की जयंती पर दस अक्टूबर को दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में जागरण साहित्य सृजन सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा।
इसमें 11 लाख की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। दस अक्टूबर तक देश के विभिन्न शहरों में सामाजिक और राष्ट्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।
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