उत्तराखंड के इस बाघ को उम्रकैद मिलेगी या साबित होगा बेगुनाह... DNA करेगा तय
अल्मोड़ा के सल्ट में पकड़े गए बाघ का भविष्य डीएनए जांच तय करेगी। यह जांच निर्धारित करेगी कि हमलावर बाघ ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, रामनगर। जिला अल्मोड़ा के सल्ट ब्लाक में जवान होते ही पकड़ा गया व्यस्क बाघ का भविष्य डीएनए जांच तय करेगी कि उसे आजीवन रेस्क्यू सेंटर में ही रखा जाए या जंगल में स्वछंद घूमने की फिर से आजादी मिलेगी।
अल्मोड़ा वन प्रभाग के अंतर्गत सल्ट ब्लाक के मोहान रेंज के डभरा सौराल में बीती तीन अगस्त को बाघ ने 21 वर्षीय नव विवाहिता शालू नेगी को मार दिया था। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद हमलावर बाघ को पकड़ने के लिए अल्मोड़ा वन प्रभाग की टीम ने प्रयास शुरू किए।
बाघ की उम्र करीब पांच साल
इसके लिए नैनीताल वन प्रभाग के रेस्क्यू विशेषज्ञ डा. हिमांशु पांगती व पश्चिमी वृत्त के डा. राहुल सती को बुलाया गया। बाघ को पकड़ने के लिए रानीखेत, जौरासी, कार्बेट की टीम की भी मदद ली गई। बुधवार रात में वन कर्मियों ने बौरड़ा व रतनिया के बीच जंगल में बाघ को पकड़ लिया।
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पकड़े गए बाघ की उम्र करीब पांच साल आंकी जा रही है। वह पूरी तरह स्वस्थ है। जो बाघ पकड़ा गया है उसी ने नव विवाहिता को मारा था या हमलावर कोई दूसरा बाघ है। इसके लिए वन विभाग डीएनए जांच कराएगा। पूर्व में नव विवाहिता के शव पर मिले बाघ के लार, बाल के सेंपल डीएनए जांच को लिए गए थे।
इसके अलावा पकड़े गए बाघ के लार व खून के सैंपल भी रेस्क्यू के बाद जुटाए गए थे। अब दोनों सैंपल को डीएनए जांच के लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून भेजा जाएगा। कार्बेट के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि अल्मोड़ा वन प्रभाग डीएनए जांच की रिपोर्ट कार्बेट को सौंपेंगा। यदि रिपोर्ट में यही हमलावर होगा तो उसे आजीवन रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा। अन्यथा उसे कहीं भी जंगल में वापस छोड़ दिया जाएगा।
