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काशीपुर सीलिंग भूमि धोखाधड़ी, हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी को लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई के दिए निर्देश

Published: Thu, 12 Mar 2026 10:20 AM (GMT+05:30)

कोर्ट ने जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं, जिनकी वजह से सरप्लस ...और पढ़ें

काशीपुर में धोखाधड़ी से सीलिंग की भूमि बिक्री पर कोर्ट सख्त. Concept Photo

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने काशीपुर में सीलिंग की भूमि को धोखे से बेचे जाने के मामले को गंभीरता से लिया। न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब भूमि एक बार सरप्लस घोषित कर दी गई थी तो राजस्व अभिलेखों में इसका अंकन क्यों नहीं किया गया?

न्यायालय ने इसे एक गंभीर स्थिति मानते हुए जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को उन अधिकारियों के विरुद्ध विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं, जिनकी लापरवाही के कारण इस प्रतिबंधित भूमि की बिक्री संभव हो सकी।

याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी के अनुसार बीना व जसवंत सिंह ने काशीपुर के खसरा नंबर 13 मीन की 0.418 हेक्टेयर भूमि का विक्रय विलेख (सेल डीड) आवेदक के पक्ष में निष्पादित किया था। लेकिन यह भूमि उत्तर प्रदेश अधिरोपण और भूमि जोत सीमा (संशोधन) अधिनियम, 1972 के तहत पहले ही सरप्लस घोषित की जा चुकी थी।

कोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) काशीपुर की ओर से आरोपित बीना को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया गया था कि वह इस भूमि पर अवैध रूप से काबिज है। इसके बावजूद, तथ्यों को छिपाकर जमीन बेच दी गई।

सुनवाई के दौरान आरोपित व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए, जहां बीना ने अनभिज्ञता जाहिर की, जबकि जसविंदर सिंह ने अपनी गलती स्वीकारते हुए याची लक्ष्मी को छह लाख रुपये का चेक कोर्ट में ही सौंपा। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया कि सरकारी तंत्र की विफलता के बिना ऐसी धोखाधड़ी मुमकिन नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन दोषी अधिकारियों की पहचान की जानी चाहिए, जिन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया और राजस्व रिकार्ड को अपडेट नहीं होने दिया।

हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी उधमसिंहनगर को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर अपनी अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को तय की गई है। साथ ही, कोर्ट ने अन्य प्रतिवादियों को भी अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

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