क्या है काठगोदाम-हनुमानगढ़ी रोपवे प्रोजेक्ट? 375 रुपए में पहुंचेंगे नैनीताल... कैंची धाम तक होगा विस्तार
कैंची धाम में नौ महीने में 50 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण काठगोदाम-हनुमानगढ़ी रोपवे परियोजना का विस्तार अब कैंची धाम तक किया जाएगा।

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। देश-दुनिया के श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र कैंची धाम की वजह से काठगोदाम टू नैनीताल (हनुमानगढ़ी) रोपवे प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव होगा। पिछले नौ महीने में करीब 50 लाख लोग मंदिर में दर्शन को आ चुके हैं।
पर्वतीय सड़कों पर यातायात के दबाव को कम करने और लोगों को परिवहन का नया विकल्प देने के लिए अब काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंचीधाम तक रोपवे सुविधा की कवायद शुरू हो चुकी है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है। अहम प्रोजेक्ट को लेकर प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने बुधवार को सर्किट हाउस में अफसरों संग बैठक की। रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर के बीच 250 मीटर लंबा फुटओवर ब्रिज भी तैयार होगा, ताकि ट्रेन से उतरने के बाद लोग इस ब्रिज का इस्तेमाल कर सीधा रोपवे स्टेशन तक पहुंच सकें।
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काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक 14.9 किमी लंबे रोपवे को लेकर 2018 से सर्वे का दौर चल रहा है। प्रोजेक्ट की लागत 2721.52 करोड़ है लेकिन अब योजना को दायरा बढ़ाकर इसे कैंचीधाम तक ले जाया जाएगा। प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव लोनिवि पंकज पांडे और सचिव पर्यटन धीरज गर्ब्याल ने सर्किट हाउस में बैठक के दौरान प्रोजेक्ट पर मंथन करने के बाद अफसरों संग रेलवे स्टेशन और रानीबाग का निरीक्षण भी किया।
प्रमुख सचिव के अनुसार सीएम के निर्देश हैं कि आगे प्रोजेक्ट कैसे तय होगा, बदलाव के बाद क्या स्थिति रहेगी, भूमि अधिग्रहण और निर्माण से जुड़े बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की जानी है। अफसरों के अनुसार दो रास्तों से लोग कैंचीधाम पहुंच रहे हैं। काठगोदाम से ज्योलीकोट और भीमताल होकर और कालाढूंगी रोड से नैनीताल और ज्योलीकोट से वाया भवाली के रास्ते।
काठगोदाम और ज्योलीकोट से रोपवे को कैंचीधाम की ओर मोड़ने पर सड़कों का दबाव कम होने के साथ ही श्रद्धालुओं को दूसरा विकल्प भी मिलेगा। वर्तमान में ज्योलीकोट से मंदिर की सड़क दूरी करीब 24 किमी है। रोपवे से दूरी कम हो जाएगी। बैठक में डीएम ललित मोहन रयाल, एडीएम सौरव असवाल, डीएफओ ध्रुव सिंह मर्तोलिया, मुख्य अभियंता पीएस बृजवाल आदि मौजूद थे।्र
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भविष्य की बाधाओं से बचने को अध्ययन पर फोकस
काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक प्रस्तावित रोपवे के लिए 78 टावरों का निर्माण किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण चयनित स्थानों की भू-गर्भीय रिपोर्ट तैयार की जाएगी। विस्तृत तकनीकी अध्ययन पर फोकस जरूरी है, ताकि पर्यावरणीय चिंता के आधार पर भविष्य में प्रोजेक्ट को लेकर कानूनी अड़चन पैदा न हो सके।
रोजाना औसतन 18 हजार पहुंच रहे नैनीताल
कालाढूंगी से वाया मंगोली और काठगोदाम से ज्योलीकोट होकर रोजाना औसतन 18 हजार लोग नैनीताल पहुंचते हैं। कालाढूंगी की ओर से साढ़े नौ हजार और हल्द्वानी से नौ हजार की संख्या है। सड़कों को दबाव मुक्त करने के लिए राज्य सरकार रोपवे प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारना चाहती है।
नैनीताल का किराया 375, हर घंटे 1800 को सवारी
अफसरों के अनुसार रोपवे हर घंटे एक दिशा से 1800 लोगों को काठगोदाम से हनुमानगढ़ी पहुंचाएगी। दस घंटे संचालन के हिसाब से अधिकतम संख्या 18 हजार पहुंच जाएगी। प्रति व्यक्ति किराया 375 रुपये रखा गया है। अफसरों का अनुमान है कि रोपवे बनने पर करीब 60 प्रतिशत ट्रैफिक शिफ्ट हो जाएगा।
काठगोदाम, रानीबाग से ज्योलीकोट तक पार्किंग
रोपवे पर चढ़ने के लिए पर्यटकों को निजी कार या टैक्सी को खड़ा करना होगा। इसलिए पार्किंग निर्माण जरूरी है। सबसे बड़ी पार्किंग रानीबाग में होगी। बंद हो चुकी एचएमटी फैक्ट्री परिसर का बड़ा हिस्सा काम में आएगा। काठगोदाम रेलवे स्टेशन, रोपवे के शुरुआती केंद्र रोडवेज परिसर, ज्योलीकोट तक में पार्किंग बनाई जाएगी। भवाली से पहले सेनिटोरियम के पास भी संभावना तलाशी जा रही है। वनभूमि से जुड़ा मामला सामने आने पर लैंड ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होगी।
सरकारी, फारेस्ट संग निजी भूमि भी चाहिए
काठगोदाम से नैनीताल तक 14.9 किमी रोपवे के लिए कुल 11.03 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। 6.62 हेक्टेयर जमीन सरकारी विभागों के स्वामित्व से जुड़ी है। 3.60 हेक्टेयर फारेस्ट तो 0.80 हेक्टेयर निजी भूमि है। रोपवे 50 मिनट में लोगों को सरोवर नगरी पहुंचा देगा।
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ध्यान रखना....बोटलनेक न बन जाए हनुमानगढ़ी
रोपवे से नैनीताल जाने वाले पर्यटकों को हनुमानगढ़ी में उतारा जाएगा। वापसी वालों को यही से बैठाया जाएगा। ऐसे में नैनीताल से जुड़े इस हिस्से में दबाव बढ़ सकता है। प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने अफसरों से कहा कि ध्यान रखना है कि हनुमानगढ़ी में दबाव के कारण बोटलनेक की स्थिति पैदा न हो जाए। परेशानी से बचने के लिए यहां भी पार्किंग बनानी होगी। बैठक में योजना के केंद्रीय
पर्वतमाला परियोजना का हिस्सा तो केंद्रीय कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव
गढ़वाल में केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे योजना को केंद्र की पर्वतमाला परियोजना में शामिल किया गया है। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि नैनीताल-कैंची योजना पर्वतमाल का हिस्सा बनी तो केंद्रीय कैबिनेट में प्रस्ताव लाना पड़ेगा। स्वीकृति पर केंद्र से आर्थिक सहयोग मिलेगा। हालांकि, राजस्व का बड़ा हिस्सा राज्य के खाते में जाएगा।
