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ज्योलीकोट: हाई कोर्ट में पेश अधिकारी नहीं बता सके गंदे पानी का स्रोत, मुख्य सचिव को तलब करने की चेतावनी

Published: Wed, 30 Sep 2026 09:57 AM (GMT+05:30)

नैनीताल हाई कोर्ट ने ज्योलीकोट में दूषित पेयजल के स्रोत का पता न लगा पाने पर अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी ...और पढ़ें

नैनीताल हाई कोर्ट।

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने नैनीताल जिले के ज्योलीकोट व आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण फैली बीमारी के मामले पर मंगलवार को सुनवाई की।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष जिलाधिकारी, सीएमओ तथा जल संस्थान व पेयजल निगम के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से संक्रमण की वजह बने मूल जल स्रोतों के संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाने पर कड़ी नाराजगी जताई और महाधिवक्ता से स्पष्टीकरण मांगा।

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मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि अगली तिथि तक दूषित पानी के स्रोतों का पता लगाकर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। पिछली सुनवाई में प्रशासन की ओर से स्थिति सामान्य होने और जल स्रोतों के सैंपल ठीक होने का दावा किया गया था, लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्टों ने इन दावों की पोल खोल दी।

वीरभट्टी, बेलुआखान और सरिताताल समेत 10 स्थानों से लिए गए पेयजल सैंपल इंडियन ड्रिंकिंग वाटर लैब में फेल पाए गए और पानी में घातक बैक्टीरिया मिले। इसके अतिरिक्त खुर्पाताल क्षेत्र के निवासियों ने सरिता ताल के पास सीवर लाइन चोक होने से पेयजल स्रोतों में गंदगी मिलने तथा बीमारी फैलने की आशंका के संबंध में प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिसे कोर्ट ने रिकार्ड पर लिया।

बीमारी फैलने का मुख्य कारणों पर दें जवाब

कोर्ट ने अधिकारियों को ग्रामीण स्वास्थ्य के प्रति संवेदनहीनता और ग्रामीणों की ओर से एक माह पूर्व की गई बदबूदार पानी की शिकायत पर समय से संज्ञान न लेने पर जमकर फटकार लगाई। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि टैंकरों के माध्यम से सप्लाई किए जा रहे पानी में अत्यधिक क्लोरीन मिलाया जा रहा है, जिससे प्रभावित लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

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कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि छह अक्टूबर नियत करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि सरकार अगली सुनवाई तक बीमारी फैलने के मुख्य कारणों पर ठोस जवाब नहीं देती, तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए जाएंगे।