बेतहाशा पर्यटकों की भीड़, बुनियादी ढांचे की कमी से खतरे में पहाड़: हिमालयन इकोज में बोले जस्टिस दयाल
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अनीस दयाल ने नैनीताल में हिमालयन इकोज फेस्टिवल में पहाड़ों पर बेतहाशा पर्यटन, बुनियादी ढांचे ...और पढ़ें

नामचीन लेखक-साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं पर भी गंभीर चर्चा.

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हिमालयी साहित्य, कला व पारिस्थितिकी को समर्पित बुटीक फेस्टिवल हिमालयन इकोज का 11 वां संस्करण शुरू हो गया है। इस मौके पर लेखकों, साहित्यकार-रचनाकारों ने अपनी कृतियों के माध्यम से विचारों का आदान प्रदान किया।
मुख्य वक्ता दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अनीस दयाल का कहना है कि बेतहाशा पर्यटकों की भीड़, बुनियादी ढांचे की कमी, पर्यावरण के प्रति घटती संवेदनशीलता से पहाड़ खतरे में हैं। उन्होंने नेपाल में आई आपदा को बेहद गंभीर चेतावनी बताते हुए कहा कि विचारहीन पर्यटन पर अंकुश जरूरी है।
जस्टिस दयाल का कहना था कि दिमाग के किसी हिस्से का नजर अंदाज कर कोई पूर्ण नहीं बन सकता है।पहाड़ विनम्रता, करुणा, शांति और संकल्प का पाठ पढ़ाते हैं, इसलिए उन्हें पहाड़ पसंंद हैं। जीवन भी एक बेहतरीन किताब की तरह है, या माउंटेन ट्रेल की तरह, है, जो शुरुआत में पूरा रास्ता नहीं दिखाता है। प्रसादा भवन में आयोजित कार्यक्रम में जस्टिस दयाल ने रस्किन बांड से बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि जब आप पहाड़ों पर कुछ समय के लिए जाते हें, तो वहीं के हो जाते हैं।
बोले हर जज एक लेखक है, उन्होंने कहा कि पहाड़ जलवायु परिवर्तन का केंद्र बिंदु है, इसलिए हिमालयन इकोज की महत्ता और बढ़ गई है। हमारी संस्कृति में पहाड़ों को भगवान मानते हैं, जिनका भय माना जाना चाहिए और जिनसे प्रेम किया जाना चाहिए।
सवाल उठाया कि हम पहाड़ों से बहुत कुछ ले रहे हैं, लेकिन पहाड़ों को क्या दे रहे हैं? पहाड़ों को टनों के हिसाब से कचरा, सुरंग व सड़क के लिए कटान। पहाड़ों के दिल को चीरता हुआ बुलडोजर दर्द देता है। उन्होंने कहा कि साहित्य की दुनिया ने भी संपूर्ण जलवायु परिवर्तन के दृष्टिकोण को नजरअंदाज कर दिया है।
भूटान की प्रसिद्ध साहित्यकार चादोर वांग्मो ने कहानियां व दंतकथाएं नामक सत्र में प्रसिद्ध लेखिका सुनीता पंत बंसल के साथ बातचीत में भूटान की प्रेरणादायक कहानी सुनाई। इस दौरान लेखिका बंसल ने बचपन में मां की सुनाई कहानियां साझा की। फ्रांसिसी कलाकार व एस्ट्रो साइंटिस्ट प्रियंका राजकाकति के साथ तो नेपाल के ऋषि अमात्य ने 2015 के नेपाल के भूकंप की त्रासदी का उल्लेख किया।
वरिष्ठ पत्रकार अमीश त्रिपाठी व मीडिया उद्यमी अनुराधा प्रसाद ने पहाड़ों व नदियों की दिव्यता के संरक्षण पर जोर दिया। वंदिता दूबे, रुचिना घिल्डियाल, अदिति सिंह साह, बाल लेखिका पारो आनंद ने विचार रखे।
इससे पहले आयोजक जान्हवी प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत करते हुए फेस्टिवल की रूप रेखा बताई। इस मौके पर पीपल बाबा, अंकिता जैन, पाखी पाण्डे, सुखमय मजुमदार, कीवा सिंह, निखिल सहित अन्य मौजूद रहे।
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