नैनीताल, [जेएनएन]: हाई कोर्ट ने राज्य कर विभाग में दस हजार करोड़ के टैक्स चोरी के मामले में सुनवाई करते हुए विभाग के 37 अफसरों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एक लाख रुपये सिक्योरिटी कोर्ट में जमा कराए गए हैं। 

रुड़की हरिद्वार निवासी धर्मेद्र सिंह ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उत्तराखंड में उद्योग लगाने के लिए ट्रेड टैक्स अधिकारियों द्वारा औद्योगिक घरानों व उद्योगपतियों से उद्योग लगाने के लिए एक हजार करोड़ से अधिक टैक्स के रूप में वसूले गए हैं, जो सरकार के खाते में जमा नहीं किया गया है। 

आरोप है कि ये अधिकारी हर साल दस हजार करोड़ रुपये राजस्व का चूना सरकार को लगा रहे हैं। पूर्व में ट्रेड टैक्स कमिश्नर द्वारा पांच अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था परन्तु सरकार ने इन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 

इन अफसरों में असिस्टेंट कमिश्नर विनय कुमार शुक्ला, डिप्टी कमिश्नर पीपी शुक्ला, पीएस डुंगरियाल, शिवेंद्र प्रताप सिंह, पीएस नगन्याल शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सूचना आयोग द्वारा भी संयुक्त कमिश्नर नवीन जोशी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 

विपक्षी सचिव वित्त अमित सिंह नेगी द्वारा कोर्ट में दाखिल जवाब में याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को गलत ठहराया है। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद सभी 37 अफसरों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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