नैनीताल, [जेएनएन]: उत्तराखंड की छोटी-छोटी नदियों और गधेरों में उपखनिजों की निकासी के लिए बनायी जानी वाली रिवर ट्रेनिंग पॉलिसी को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है। जिसे गंभीरता से लेते हुए हार्इकोर्ट ने सरकार से छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। 

दरअसल, धुमाकोट निवासी विनोद बिष्ट ने रिवर ट्रेनिंग पॉलिसी को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि खनन की तरह जिलों में मौजूद छोटी-छोटी नदियों और गधेरों में उपखनिजों की निकासी की जाती है। इन नदियों में खनिजों की निकासी का जिम्मा जिलाधिकारियों के हाथों में है। जिलाधिकारी जिसे चाहे नदियों से खनन कराने का कार्य सौंप सकता है।  

याचिकाकर्ता का कहना है कि खनन पॉलिसी की ही तरह प्रदेश में छोटी नदियों में खनन करवाने के लिये 30 सितंबर 2016 को रिवर ट्रेनिंग पॉलिसी बनायी गयी। इस पॉलिसी के तहत जिलाधिकारियों को नदियों से खनन कार्य करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस पॉलिसी के अंतर्गत खनन कार्य के लिए न तो प्रक्रिया निर्धारित की गयी है और न ही पारदर्शिता तय की गयी है। जिलाधिकारी बिना प्रक्रिया अपनाए जिसे चाहे उसे खनन का कार्य सौंप सकता है। 

उनका कहना है कि खनन नीति की तरह ही रिवर ट्रेनिंग पॉलिसी के तहत खनन करवाने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनायी जाए और प्रावधान तय किये जाएं। इससे जहां पूरे कार्य में पारदर्शिता रहेगी वहीं राज्य के राजस्व में भी बढोतरी भी होगी। न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की पीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने कहा है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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