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हाई कोर्ट ने पूछा, निकायों के सीमा विस्तार से पहले सुनवाई का मौका क्यों नहीं दिया

हाई कोर्ट ने निकायों के सीमा विस्तार को चुनौती देती याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता से पूछा कि परिसीमन करते समय प्रभावित लोगों को सुनवाई का मौका क्यों नहीं दिया गया।

By Sunil NegiEdited By: Published: Thu, 08 Mar 2018 08:51 PM (IST)Updated: Fri, 09 Mar 2018 11:25 AM (IST)
हाई कोर्ट ने पूछा, निकायों के सीमा विस्तार से पहले सुनवाई का मौका क्यों नहीं दिया

नैनीताल, [जेएनएन]: हाई कोर्ट ने निकायों के सीमा विस्तार को चुनौती देती याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता से पूछा कि सरकार द्वारा परिसीमन करते समय प्रभावित लोगों को सुनवाई का मौका क्यों नहीं दिया गया। महाधिवक्ता ने इस मामले में सरकार की ओर से स्थिति साफ करने के लिए एक दिन का वक्त मांगा। अब कोर्ट इस मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई करेगी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर राज्य के तमाम गांवों का परिसीमन कर उन्हें निकायों में शामिल किया जा रहा है और ग्राम प्रधानों पर बस्ते जमा करने का दबाव डाला जा रहा है। पूर्व में कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

इन याचिकाओं में भवाली क्षेत्र के  प्रधान संजय जोशी, हल्द्वानी के ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट, गाम पंचायत बाबूगढ़ संघर्ष समिति कोटद्वारा, पिथौरागढ़ की दौला वास्ते, नेडा धनोरा समेत 12 दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने सरकार के आदेश को चुनौती दी है। याचिकाओं में कहा गया है कि सरकार द्वारा उन्हें सुनवाई का मौका तक नहीं दिया गया।

बिना सुनवाई के लिए निकायों में ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किया जा रहा है, जो नियम विरुद्ध है। साथ ही यह भी कहा कि निकायों के सीमा विस्तार व निकायों में ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल करने के मामले में तय प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए नियत कर दी है।

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