तीनपानी फ्लाईओवर हादसाः उत्कर्ष की मौत से उजड़ गया मां-बाप का संसार, सिद्धांत की मां बदहवास
हल्द्वानी के तीनपानी फ्लाईओवर पर हुए भीषण सड़क हादसे में जेईई की तैयारी कर रहे दो होनहार छात्रों उत्कर्ष और ...और पढ़ें
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हल्द्वानी के तीनपानी फ्लाईओवर हादसे में मृतक सिद्धांत का फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
पुष्कर अधिकारी हल्द्वानी। आंखों में जेईई के बड़े सपने संजोए दो होनहार दोस्तों की जिंदगी तीनपानी फ्लाईओवर पर रफ्तार के एक खूनी झटके से हमेशा के लिए थम गई। इस दर्दनाक हादसे ने दो घरों के आंगन में ऐसा अंधेरा पसरा कि सुनने वालों की रूह कांप उठी।
परिवार का इकलौता चिराग होने के कारण उत्कर्ष के जाने से उसका पूरा संसार ही उजड़ गया, वहीं दो भाइयों में से छोटे सिद्धांत की असमय मौत की खबर ने उसकी मां को इस कदर तोड़ दिया कि वह बदहवास हालत में पागलों की तरह मोर्चरी की तरफ दौड़ पड़ी।
कल तक जो मां-बाप बच्चों के सुनहरे भविष्य की दुआएं मांग रहे थे, आज उनकी आंखों के सामने बस उम्र भर का रोना बाकी रह गया है। वहीं, घायल भाविका और प्रांजय मावड़ी के स्वजन अस्पताल में हाथ जोड़ भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार उत्कर्ष के पिता शैलेंद्र ने हाल ही में कार खरीदी थी। करीब एक साल पहले ही बागेश्वर से आकर उन्होंने ऊंचापुल में अपना घर बनाया था। बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने कई सपने संजोए थे, लेकिन हादसे ने सब कुछ छीन लिया।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उधर, सिद्धांत की मां पुष्पलता पाठक को जब हादसे की सूचना मिली तो वह बेटे की सलामती की उम्मीद लेकर एसटीएच पहुंचीं। एसएसआइ रोहताश सागर ने उनसे कई बार संपर्क किया लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
जब फोन उठा तो सड़क हादसे की सूचना देकर अस्पताल बुलाया। मां की घबराहट देखकर पुलिसकर्मी उन्हें बेटे की मौत की खबर नहीं दे पाए। इसी बीच कोचिंग से पहुंचे साथियों ने जब उन्हें यह दुखद सूचना दी तो वह बदहवास होकर अस्पताल से मोर्चरी की ओर दौड़ पड़ीं।
मां की यह हालत देखकर अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सिद्धांत के पिता रवि मोहन पाठक रानीखेत में इंजीनियर हैं। उसका बड़ा भाई दिल्ली में रहता है।
परिवार अभी एक माह पहले ही सिद्धांत के दादा के निधन का दुख झेल रहा था कि अब बेटे की मौत ने उसे गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे के बाद एसटीएच पहुंचे स्वजन और दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल था।
120 से 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही थी कार
एसएसपी डा. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार की रफ्तार 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक थी। कार दूसरी गाड़ी को ओवरटेक करने के बाद अनियंत्रित हुई और कई पलटियां खाते हुए डिवाइडर से टकरा गई।
हादसे में कार की छत पूरी तरह पिचक गई और वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कहा कि पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है और घटनास्थल की साक्ष्य संकलन की कार्रवाई की गई है।
एसएसपी ने अभिभावकों से अपील की कि नाबालिगों को वाहन देने और उनकी गति पर विशेष ध्यान रखें। खाली सड़क मिलने का अर्थ यह नहीं कि वाहन तेज रफ्तार से चलाया जाए।
दोस्त से मिलने निकला था सिद्धांत, हमेशा के लिए छूट गया साथ
सिद्धांत पाठक शुक्रवार को घर से मां पुष्पलता पाठक को यह कहकर निकला था कि वह अपने दोस्त उत्कर्ष धपोला से मिलने जा रहा है। दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और वे साथ में कोचिंग पढ़ते थे। इसके बाद दोनों का संपर्क प्रांजय मावड़ी और भाविका से हुआ।
चारों विद्यार्थी 12वीं में पढ़ते थे और जेईई की तैयारी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उत्कर्ष घर से कार लेकर निकला था। हादसे में दोनों दोस्तों की मौत ने उनके साथ पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी गहरे सदमे में डाल दिया। कुछ देर पहले तक साथ रहने वाले दोस्तों के बिछड़ने की खबर से एसटीएच पहुंचे साथी रो पड़े।
