नैनीताल, जेएनएन : नैनीताल में शोधग्रंथों के मूल्यांकन में देरी करने वाले परीक्षक बाज आ जाएं, शोधपत्र भेजने के छह माह से अधिक समय तक यदि परीक्षक द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तो उन्‍हें मूल्यांकन के लिए शोध सलाहकार समिति ब्लैकलिस्टेड कर सकती है। यह निर्देश कुलपति प्रो. केएस राणा ने गुरुवार को दिए।

रिजर्व खाली सीटों के लिए पुन: होगी परीक्षा

कुमाऊं विवि के प्रशासनिक भवन में गुरुवार को शोध सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। कुलपति प्रो. केएस राणा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शोध कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने और यूजीसी की 2016 और 2018 में प्रावधानित नियमों को लागू करने के संबंध में विचार विमर्श किया गया। बैठक में शोध व प्रसार निदेशक प्रो. एससी चंदोला ने बताया कि यूजीसी के द्वारा 27 अगस्त 2018 के अधिसूचना जारी की गई है जिसके आधार पर प्रवेश परीक्षा में एससी, एसटी और ओबीसी को पांच प्रतिशत अंकों की छूट दी गई है। उन्होंने बताया कि छूट के बावजूद आरक्षित श्रेणी की सीटें खाली रह जाती हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि ऐसी स्थिति में विवि इन खाली सीटों पर सामान्य श्रेणी के लिए प्रवेश परीक्षा के समाप्त होने के एक माह के भीतर विशेष परीक्षाएं आयोजित करेगा। निर्णय लिया गया कि यूजीसी के प्रावधानों के आधार पर प्रवेश परीक्षाओं में लिखित के साथ ही साक्षात्कार भी आयोजित किया जाएगा। जिसके आधार पर ही शोधार्थियों को शोध निर्देशक आवंटित किए जाएंगे।

...तो किया जाएगा ब्‍लैकलिस्‍ट

शोधग्रंथ मूल्यांकन के लंबित प्रकरणों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कुलपति ने निर्देश दिए कि सभी शोध परीक्षक समय से मूल्यांकन कर ले। शोधग्रंथ मिलने के छह माह से अधिक अवधि तक यदि परीक्षक कोई कार्रवाई नहीं करता तो ऐसे परीक्षकों को भविष्य में काली सूची में डाल दिया जाएगा। उन्होंने पीएचडी और डी.लिट की मौखिक परीक्षाओं को सूचना मिलने के तीन माह के भीतर कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि शोधार्थी एक विषय में एक ही बार पीएचडी, डी.लिट व डीएससी की उपाधि ले पाएंगे। बैठक में कुलसचिव डॉ. महेश कुमार, वित्त नियंत्रक दिनेश राणा, प्रो. एसपीएस मेहता, कार्य परिषद सदस्य केवल सती, अरविंद पडियार, प्रो. अजय अरोड़ा, प्रो. एमसी जोशी, प्रो. राजीव उपाध्याय, डॉ. अर्चना नेगी, प्रो. जेएस बिष्ट, प्रो. अमित जोशी, प्रो. संजय टम्टा, डॉ. आशीष तिवारी आदि मौजूद रहे।

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