जागेश्वरधाम (अल्मोड़ा) जेएनएन : बारह ज्योतिर्लिंगों मेंं शुमार जागेश्वर धाम की परंपरा बदल गई। इतिहास में पहली बार बाबा जागनाथ की धरा पर सूर्यग्रहण पर ज्योतिर्लिंग हो या महामृत्युंजय मंदिर, सबके कपाट बंद रखे गए। इससे पूर्व सूर्य या चंद्र ग्रहण काल में जागेश्वर मंदिर समूह में कपाट बंद करना तो दूर महाआरती, पूजन व भोग आदि तक निष्टïकंटक चलते थे। यह निर्णय बदरीनाथ के धर्माधिकारी एवं वेदपाठी के साथ गहन विचार विमर्श बाद लिया गया। इसी आधार पर जागेश्वर मंदिर समूह के कपाट तीन घंटे के लिए बंद रखे गए। इस अवधि में पूजा अर्चना नहीं की गई।

गर्भगृह में चंदवंशी राजा दीप चंद एवं पवन चंद की प्रतिमाएं

मंदिर के प्रधान पुरोहित पं. हेमंत भट्ट ने बताया कि जागेश्वर धाम मंदिर समूह में ज्योतिर्लिंग मंदिर के गर्भगृह में प्रतापी चंदवंशी राजा दीप चंद एवं पवन चंद की अलग-अलग प्रतिमाएं हैं। दोनों ही चंदवंशी शासकों ने विरासत में मिले जागेश्वर धाम में पूजा व्यवस्था व धार्मिक अनुष्ठानों के लिए 103 गांवों की गूंठ दान में दी। इसी आधार पर यहां पूजा, महाआरती व भोग आदि निर्धारित किया गया।

जब तक सूर्य एवं चंद्र हैं पूजा होती रहेगी

बकौल प्रधान पुरोहित पं. हेमंत, प्रतापी चंदशासक राजा पवन चंद (1551 से 1555) अपने हाथों में प्रतिज्ञा स्वरूप संकल्प लिए हुए हैं। वहीं राजा दीप चंद (1748-1777) के हाथों में अखंड बत्ती जली आ रही, जो जब तक सूर्य एवं चंद्रमा रहेंगे, जागेश्वर धाम में किसी भी परिस्थिति में पूजा नहीं रुकने का संदेश देती है। यानी पूजा होती रहेगी। यही कारण है कि आज तक जागेश्वर धाम की दैनिक पूजन व्यवस्था कभी नहीं बदली। यानी सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण पर जागेश्वर धाम के कपाट कभी बंद नहीं हुए।

सुबह 11 बजे बाद हुआ रुद्राभिषेक

प्राचीन परंपानुसार सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पूर्व ही प्रारंभ हो जाता है। ऐसे में बीती बुधवार देर शाम 8:21 से पूर्व ही जागेश्वर मंदिर समूह के सभी मंदिरों में आरती आदि कर ली गई। गुरुवार को मंदिर समूह के कपाट प्रात: ग्रहण मोक्ष के पश्चात 11 बजे सभी मंदिर शुद्धिकरण के लिए खुलेंगे। इसके बाद ही रुद्राअभिषेक, भोग पूजन, दर्शन किए गए। 

काफी विचार-विमर्श के बाद लिया गया निर्णय

पं. हेमंत भट्ट, प्रधान पुरोहित जागेश्वर धाम ने बताया कि जागेश्वर धाम के धर्माचार्य पं. लक्ष्मी दत्त भट्ट और मेरा श्री बदरीनाथ मंदिर के धर्माधिकारी वेदपाठी पं. भुवन चंद्र उनियाल से लंबा विचार विमर्श हुआ। निष्कर्ष निकाला गया कि अन्य ऐतिहासिक धर्म स्थलों व देवालयों की भांति सूर्यग्रहण की अवधि तक बाबा जागेश्वरनाथ की नगरी में भी मंदिर समूह के कपाट बंद रखे जाएंगे। इसी आधार पर तीन घंटे तक कपाट नहीं खोले गए।

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Posted By: Skand Shukla

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