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Antibiotics Awareness: अस्पतालों की गंदगी से फैलते संक्रमण ने भी बढ़ाया एएमआर का खतरा, खास रिपोर्ट

Published: Sun, 08 Feb 2026 02:08 PM (IST)

सरकारी अस्पतालों में गंदगी और बिखरे बायोमेडिकल कचरे से संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है, जिससे मरीजों को एंटीबायोटिक्स लेने ...और पढ़ें

सरकारी अस्पतालों में बिखरा बायोमेडिकल वेस्ट, समय पर नहीं होती है सफाई. Jagran

सरकारी अस्पतालों में बिखरा बायोमेडिकल वेस्ट, समय पर नहीं होती है सफाई. Jagran

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी । सरकारी अस्पताल में बीमारी के इलाज के लिए मरीज भर्ती होते हैं लेकिन अस्पतालाें की गंदगी नई बीमारी पैदा कर रही है। जहां तहां बिखरी गंदगी संक्रमण का कारण बनती है। इसकी वजह से मरीजों को कई बार एंटीबायोटिक्स लेने को मजबूर होना पड़ता है, जो मरीजों को एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंट (एएमआर) का खतरा बढ़ा देता है। दैनिक जागरण की अस्पतालों में स्वच्छता को लेकर की गई पड़ताल में भी जहां-तहां गंदगी बिखरी हुई नजर आई। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही दिखी।

केस 1 : जागरण की टीम दाेपहर करीब 12:30 डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में स्वच्छता की स्थिति देखने पहुंची। इस समय वहां साफ सफाई का कार्य चल रहा था। इसके बाद वार्डों की तरफ गए, तो सबसे पहले स्त्री व प्रसूति रोग विभाग में पहुंचे। यहां पर जच्चा-बच्चा वार्ड में एक बेड पर मरीज व दो से तीन लोग बैठे थे। वार्ड में एक बड़े से डब्बे में सफेद कपड़े व इस्तेमाल हुई चादरों का ढेर पड़ा था। शाैचालय में पहुंचे तो देखा कि एक कूड़ेदान में खून से सनी पट्टियां खुली पड़ी थी। इधर, आर्थो वार्ड में भर्ती मरीज के पास 10-12 लोग घेर कर खड़े थे। जबकि विभाग में सख्त निर्देश है कि एक मरीज के साथ एक व्यक्ति रहेगा।

केस 2 : दोपहर करीब 12:50 बजे के समय जागरण की टीम सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में पड़ताल के लिए पहुंची। यहां अस्पताल में प्रवेश करते ही सबसे पहले इमरजेंसी के बगल में बने शौचालय में गए। जहां देखा कि शौचालय में खून की छीटे पड़े है।इसको देखकर लोग शौच करने के लिए भीतर नहीं घुस पाए। यदि यह खून किसी की चप्पल में लगा या कपड़ों तक पहुंचा तो यह संक्रमण पैदा कर सकता है। इसके अलावा अस्पताल के शौचालय से उठती बदबू भी मरीजों को संक्रमित करने के लिए काफी हैं।

केस 3 : शहर के बीच में स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में दोपहर करीब 1:40 बजे टीम पड़ताल करने पहुंची। अस्पताल के भीतर साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक दिखी। भर्ती वार्ड में मरीजों के बेड भी साफ थे। शौचालय से लेकर अल्ट्रासाउंड रूम में किसी तरह का संक्रमण फैलने वाला कोई सामग्री नहीं पाई गई, लेकिन अस्पताल परिसर के पीछे स्थिति बिल्कुल उलट दिखी। अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन भवन के पीछे बायोमेडिकल वेस्ट खुला पड़ा था। यहां बड़ी मात्रा में खून का डब्बा व खाली इंजेक्शन आदि पड़े थे। इन पर मक्खियां भिनभिना रही थी। खून के दाग, इस्तेमाल हुई इंजेकशन वायल व पट्टी आदि पर बैठी मक्खियां संक्रमण का वाहक बन रही थी।
तीमारदार बाेले,

शौचालय भी साफ नहीं रहते

ओखलकांडा से एसटीएच में इलाज के लिए पहुंचे हरीश प्रसाद ने बताया उनका मरीज सर्जरी विभाग में भर्ती है। यहां कई बार शौचालय भी साफ नहीं रहते हैं। इसके कारण मरीज के साथ रुकने वाले परिवार के लोगों में संक्रमण का खतरा रहता है। गदरपुर से आए मोहम्मद इस्लाम ने बताया कि स्त्री रोग विभाग में कई एक बेड पर दो मरीज लेटे मिलते हैं, जो मरीज की स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। बेस अस्पताल आए हल्द्वानी के शंकर पांडे ने बताया कि यहां के शौचालय में जाने लायक हिम्मत नहीं होती है। यह संक्रमण का बहुत बड़ा कारण है।

वार्ड में भीड़ नहीं लगाने के लिए जनता को खुद समझना होगा। तीमारदारों को सख्त निर्देश है कि एक समय में एक ही व्यक्ति रूकेगा। क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। बीच में मरीज से मिलने के लिए पास सिस्टम लागू किया था। जिसका आमजन ने विरोध किया। जहां गंदगी है उसे तत्काल साफ करने के निर्देश दिए जाऐंगे। वैसे भी नियमित सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। - डा. जीएस तितियाल, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी

अस्पताल के शौचालय में तीमारदार के साथ बाहर से आए लोग भी गंदगी करते हैं। इसे नियमित साफ भी किया जाता है। जहां ऐसी कोई समस्या है उसका तुरंत समाधान किया जाता है।- डा. केएस दत्ताल, पीएमएस, बेस अस्पताल

अस्पताल में तीनों समय पर्यावरण मित्र बायोमेडिकल वेस्ट उठाते हैं। इन्हें बाहर रखा जाता है, वहीं रोजाना गाड़ी आकर इसे उठाकर ले जाती है। सारा कूड़ा ऊधमसिंह नगर की बायोमेडिकल वेस्ट मेनेजमेंट कंपनी में जाता है। - डा. ऊषा जंगपांगी, सीएमएस, महिला अस्पताल, हल्द्वानी

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