Antibiotics Awareness: वायरल में नहीं एंटीबायोटिक की जरूरत, फिर भी धड़ल्ले से दी जा रहीं दवाइयां
हल्द्वानी में एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक और अधूरे सेवन से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का खतरा बढ़ रहा है। डॉक्टर और ...और पढ़ें

संक्रमण की पुष्टि होने पर ही डाक्टर की सलाह से लें एंटीबायोटिक. Concept Photo

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी । नैनीताल जिले में ऐसे भी कुछ डाक्टर हैं, जिन पर मरीजों को जल्दी ठीक करने का दबाव रहता है। ऐसा व्यावसायिक मजबूरी या कम ज्ञान भी हो सकता है। अक्सर झोलाछाप भी मरीजों को बेवजह या बहुत कम जरूरत होने पर भी अधिक तेज असर की एंटीबायोटिक थमा देते हैं। ऐसी स्थिति सेहत के लिए खतरनाक हो जाती है।
जिले में भी जागरण की पड़ताल में यह सामने आया कि एंटीबायोटिक दवाइयां का इस्तेमाल न केवल मेडिकल स्टोर कर रहे हैं, बल्कि कुछ डाक्टर भी कर रहे हैं। इससे मरीज को तात्कालिक राहत तो मिल जाती है, लेकिन भविष्य में गंभीर संक्रमण होने पर दवाएं असर करना बंद कर देती हैं। यही स्थिति एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) को जन्म देती है। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
केस स्टडी 1 : खुद बढ़ा ली दवा, बढ़ गया खतरा
बनभूलपुरा लाइन नंबर-17 निवासी गुफरान को सात-आठ दिन से खांसी और गले में दर्द था। सुशीला तिवारी अस्पताल में दिखाने पर उन्हें पांच दिन के लिए अजिथ्रोमाइसिन दी गई। मरीज ने बिना परामर्श के खुद ही दवा को पांच दिन और जारी रखा। विशेषज्ञों के अनुसार एंटीबायोटिक का स्वयं लेकर सेवन करना खतरनाक है, इससे बैक्टीरिया मजबूत होकर दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं।
केस स्टडी 2 : हल्के घाव में भारी एंटीबायोटिक
हल्दूचौड़ निवासी देविका के पैर में मामूली घाव था। रामपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में उन्हें सिप्रोफ्लोक्सासिन जैसी शक्तिशाली एंटीबायोटिक लिख दी गई। कुमाऊं के वरिष्ठ फिजिशियन के अनुसार यह दवा गंभीर और जटिल संक्रमणों के लिए सुरक्षित रखी जानी चाहिए। हल्के मामलों में इसका प्रयोग भविष्य में दवा की प्रभावशीलता खत्म कर सकता है।
केस स्टडी 3 : वायरल में भी एंटीबायोटिक
दमुवाढूंगा निवासी अरविंद कुमार गले के दर्द की शिकायत लेकर मुखानी के एक निजी क्लीनिक पहुंचे। उन्हें अमोक्सिसिलिन और अजिथ्रोमाइसिन दी गई, जबकि बाद में जांच में संक्रमण वायरल निकला। क्लीनिक के डाक्टर का कहना है कि कई मरीज खुद एंटीबायोटिक की मांग करते हैं। मना करने पर वे इलाज बदल लेते हैं, जिससे चिकित्सकों पर जल्द ठीक करने का दबाव रहता है।
गंभीर संक्रमण में ही दें एंटीबायोटिक, सामान्य बीमारी में इनसे बचें: प्रो. जोशी
सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. अरुण जोशी का कहना है कि तय डोज से अधिक या अनावश्यक एंटीबायोटिक लेने से जेनेटिक म्यूटेशन होता है, जिससे बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं। वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और सामान्य दर्द में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती है। अधूरी डोज और सेल्फ-मेडिकेशन से एएमआर तेजी से बढ़ता है। भविष्य में सामान्य संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है। सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है, जब मरीज पर कोई एंटीबायोटिक काम ही नहीं करती। इसलिए परामर्श पर ही दवाइयां का सेवन करें।
