Antibiotics Awareness: गोरखपुर में एंटीबायोटिक का अंधाधुंध इस्तेमाल, बढ़ रहा जानलेवा AMR का खतरा
गोरखपुर में सर्दी-जुकाम और हल्के बुखार में भी एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताई गई है। क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
आरएमआरसी सर्वे में 72% पर्चों पर अनावश्यक एंटीबायोटिक मिली।
सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक से बढ़ रहा एएमआर खतरा।
विवेकपूर्ण उपयोग से ही एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर रोक संभव।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। Antibiotics Awareness: सर्दी-जुकाम और हल्के बुखार खासकर वायरल फीवर में भी एंटीबायोटिक लिखे जाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। जबकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल फीवर में एंटीबायोटिक की कोई भूमिका नहीं है। किसी भी तरह का संक्रमण हो तभी एंटीबायोटिक देने की जरूरत है।
यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण भी बन सकती है। यह मामला हाल ही में क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) द्वारा किए गए एक सर्वे में भी उजागर हुआ है। सर्वे में 600 पर्चों की जांच की गई, जिनमें 72 प्रतिशत पर्चों पर एंटीबायोटिक लिखी मिली। जांच में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में ऐसे मरीजों को एंटीबायोटिक दी गई, जिन्हें इसकी वास्तविक आवश्यकता नहीं थी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर बड़ी संख्या में ऐसे पर्चे सामने आ रहे हैं, जिनमें बिना जरूरत एंटीबायोटिक लिखी जा रही है। इसके विपरीत जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कालेज और एम्स में चिकित्सक अपेक्षाकृत सतर्कता बरतते हुए केवल अत्यधिक आवश्यक मामलों में ही एंटीबायोटिक का प्रयोग कर रहे हैं।
बांसगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे शिवा को एंटीबायोटिक समेत अन्य दवाएं लिखी गईं। वहीं जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ज्यादातर मरीजों के पर्चों पर एंटीबायोटिक दर्ज है, चाहे बीमारी हल्की ही क्यों न हो। कैंपियरगंज क्षेत्र में बेबी, अनीता, रिया, हरिद्वार, अंश और इंद्रावती जैसे कई मरीज सर्दी-जुकाम, बुखार और पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे थे।
सभी के पर्चों पर एंटीबायोटिक लिखी गई, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में सामान्य दवाओं से ही उपचार संभव था। बीआरडी मेडिकल कालेज के मेडिसिन ओपीडी में लगभग 25 रोगियों के पर्चों की पड़ताल की गई। इनमें से केवल दो मरीजों को ही एंटीबायोटिक लिखी गई थी, वह भी पेट से जुड़ी गंभीर समस्या के कारण जिला अस्पताल में मेवातीपुर निवासी लल्लन कफ की शिकायत लेकर पहुंचे, उन्हें एंटीबायोटिक दी गई।
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संतकबीरनगर के रामलौट तीन दिन से ठंड लगकर बुखार से पीड़ित थे, उनके पर्चे पर भी एंटीबायोटिक लिखी गई। हालांकि, टीबी के एक मरीज को नियमानुसार टीबी की दवाएं दी गईं। जिला महिला अस्पताल में रिंकी, अनारी देवी, सुषमा, रेखा और विजया को एंटीबायोटिक दी गई, जिनके बारे में चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें यूटीआइ था, जहां एंटीबायोटिक आवश्यक होती है। सीएचसी चौरीचौरा में 364 नए मरीजों ने पर्चा बनवाकर डाक्टर को दिखाया। अधिकांश मरीज सर्दी-जुखाम, दर्द-बुखार, पेट दर्द व अस्थमा की समस्या लेकर आए थे। ज्यादातर को एंटीबायोटिक लिखी गई।
सर्दी-जुकाम और सामान्य बुखार प्रायः वायरल संक्रमण होते हैं, जिनमें एंटीबायोटिक का कोई असर नहीं होता। इसके बावजूद इन्हें लिखे जाने से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ रहा है, यानी भविष्य में गंभीर संक्रमण पर भी दवाएं असर नहीं करेंगी। अब समय आ गया है कि चिकित्सक, स्वास्थ्य प्रशासन और मरीज सभी मिलकर एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग को अपनाएं।-डा. राजेश कुमार, फिजिशियन जिला अस्पताल
हर बुखार या सर्दी में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। बिना जांच और स्पष्ट कारण के एंटीबायोटिक देना गलत है। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ता है। आज एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल देश के सामने चुनौती बन चुका है। यदि इसी तरह लापरवाही जारी रही तो आने वाले वर्षों में साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन सकते हैं। -डा. प्रशांत कुमार, चेस्ट फिजिशियन जिला अस्पताल
एंटीबायोटिक का अत्यधिक, अनावश्यक और गलत उपयोग एक गंभीर संकट का रूप लेता जा रहा है। सामान्य सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार में भी एंटीबायोटिक लेने से शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। इसके कारण भविष्य में गंभीर संक्रमणों पर ये दवाएं असर करना बंद कर देती हैं। जागरूकता और विवेकपूर्ण उपयोग ही इसका समाधान है। -डा. शुभांकित आर्या, असिस्टेंट प्रोफेसर मेडिसिन विभाग, बीआरडी मेडिकल कालेज
बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक लेना, अधूरा कोर्स छोड़ देना और हर बीमारी में इसका प्रयोग करना बेहद खतरनाक है। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगी तो साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन सकते हैं। हाल ही में हम लोगों ने सर्वे किया तो पता चला कि उन रोगियों को भी एंटीबायोटिक लिखी गई थी, जिन्हें इसकी आवश्यकता थी ही नहीं। चिकित्सकों को जागरूक होना होगा। -डा. हरिशंकर जोशी, निदेशक आरएमआरसी
