गोरखपुर में धड़ल्ले से बेची-खरीदी जा रही एंटीबायोटिक, ड्रग रेजिस्टेंस के शिकार हो रहे रोगी
गोरखपुर में बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक दवाओं की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है, जिससे रोगियों में एंटीबायोटिक ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
गोरखपुर में बिना पर्चे के एंटीबायोटिक की बिक्री जारी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 8,655 रोगियों में प्रतिरोध मिला।
अधूरे कोर्स से बैक्टीरिया में दवा प्रतिरोध विकसित हो रहा।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। Antibiotics Awareness: जिले में एंटीबायोटिक धड़ल्ले से बेची व खरीदी जा रही है। अपने मन से लोग दवा खरीद रहे हैं। दर्द-बुखार में मेडिकल स्टोर संचालक भी बिना डाक्टर के पर्चे के दवा दे रहे हैं, जिसमें एंटीबायोटिक भी शामिल होती है। बुधवार को मेडिकल स्टोरों पर ऐसे अनेक रोगी पहुंचे जिनके पास पर्चे काफी पुराने थे या पर्चे नहीं थे।
कुछ रोगी दवा का रैपर लेकर पहुंचे और दवाएं लिए। हालांकि कुछ मेडिकल स्टारों ने उन्हें दवाएं देने से मना कर दिया लेकिन किसी न किसी मेडिकल स्टोर से उन्हें दवाएं मिल गईं। अपने मन से दवा लेने और खाने का दुष्प्रभाव यह है कि बीआरडी मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलाजी विभाग में एक साल में 11245 रोगियों की कल्चर जांच की गई, इसमें से 8655 लोगों में सामान्यतया प्रयोग की जाने वाली पेंसिलिन व सिफैलोएस्पोरिन ग्रुप की एंटीबायोटिक का रेजिस्टेंस मिला। अब ये दवाएं उनपर काम नहीं कर रही हैं।
दवा विक्रेता समिति के अनुसार जिले में लगभग पांच हजार मेडिकल स्टोर हैं। एक मेडिकल स्टोर से प्रतिदिन एंटीबायोटिक की लगभग 60-65 गाेलियां बिकती हैं। इस तरह पूरे जिले में प्रतिदिन 30-35 हजार गोलियां बिकती हैं। इनमें से लगभग 10 हजार गोलियां रोगियों के मांगने पर या स्वयं के विवेक से फार्मासिस्ट रोगियों को दे देते हैं।
रोगियों को यह पता नहीं होता कि न्यूनतम व अधिकतम कितने दिन तक एंटीबायोटिक खानी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार अनेक रोगी दर्द-बुखार होने पर मेडिकल स्टोर या झोलाछाप से दवाएं ले लेते हैं। यदि पांच दिन एंटीबायोटिक खानी है और उन्हें दो दिन में ही आराम मिल गया तो वे दवा बंद कर देते हैं। इससे बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते और अपने भीतर संबंधित दवा का प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं। भविष्य में जब उस रोगी को पुन: एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ती है तो वह दवा काम नहीं करती।
बुधवार को बेतियाहाता में मेडिकल स्टोरों पर रोगियों की भीड़ लगी थी। एक मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंचे अलीनगर के महावीर मिश्रा के पास 12 दिसंबर 2025 का पर्चा था, जिसपर डाक्टर ने दवाएं लिखी थीं। मेडिकल स्टोर संचालक ने उन्हें दवाएं दी। पूछने पर उन्होंने बताया कि दवा लेने के पूर्व सायं पांच बजे डाक्टर के पास गए थे, उनका क्लिनिक बंद था, कर्मचारियों ने बताया कि सायं सात बजे डाक्टर साहब बैठेंगे।
इतना समय नहीं था, इसलिए पुराने पर्चे पर दवा लेने आ गए। वहीं हाल्सीगंज की कलावती भी दवा लेने पहुंची थीं। उनके पास डाक्टर का पर्चा नहीं था, वह दवाओं का रैपर लेकर आई थीं। उन्होंने बताया कि दो माह पहले डाक्टर ने ही यह दवाएं लिखी थी, उसी तरह की समस्या फिर हो गई तो दवा का रैपर लेकर दवा खरीदने आ गई। ऐसे अनेक रोगी मेडिकल स्टारों पर पहुंचे, जिनके पास डाक्टर का पर्चा नहीं था या पर्चा था तो काफी पुराना। कुछ मेडिकल स्टोरों ने दवा देने से मना कर दिया तो कुछ ने दवा दी।
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अगर किसी रोगी के पेट में दर्द है या वह दर्द-बुखार से पीड़ित है और डाक्टर उपलब्ध नहीं हैं तो उसकी समस्या को देखते हुए एक-दो खुराक दवा दे दी जाती है। इलेक्ट्राल भी दे दिया जाता है। ताकि इमरजेंसी में उसे राहत मिल जाए और दूसरे दिन डाक्टर को दिखा ले। -राजेश कुमार, दवा विक्रेता
बिना पर्चे के हम चाहते हुए भी किसी रोगी को दवा नहीं दे सकते। कुछ रोगी नाराज भी हो जाते हैं और देख देने की धमकी देते हैं। हम इसे भी बर्दाश्त करते हैं। जब वे डाक्टर से लिखवाकर ले आते हैं तभी दवा दी जाती है। इससे रोगी भी सुरक्षित रहता है और दवा विक्रेता भी।-प्रवीन, दवा विक्रेता
एंटीबायोटिक या कोई भी दवा बिना डाक्टर की सलाह के रोगियों को नहीं देनी चाहिए। कई बार डाक्टर उपलब्ध नहीं होते और रोगी पीड़ित होता है। उसे दवा देना जरूरी हो जाता है। शायद इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने हाल ही में फार्मासिस्टों को कुछ दवाएं देने की अनुमति दी है। -आलोक चौरसिया, महामंत्री दवा विक्रेता समिति
बिना डाक्टर की सलाह के दवा खासकर एंटीबायोटिक खाने के गंभीर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। एक साल के अंदर लगभग 11 हजार लोगों की कल्चर जांच की गई, इसमें लगभग आठ हजार लोगों में एंटीबायोटिक रेजीस्टेंस मिला। इसमें यूरिन ट्रैक्ट इन्फेक्शन के रोगियों की संख्या ज्यादा थी।
-डा. अमरेश कुमार सिंह, अध्यक्ष माइक्रोबायोलाजी विभाग, बीआरडी मेडिकल कालेज
