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गोरखपुर एम्स के नेत्र रोग विभाग में बिक रहा लेंस, दाम 11 से 75 हजार रुपये

Published: Thu, 05 Feb 2026 12:22 PM (IST)

गोरखपुर एम्स के नेत्र रोग विभाग में मोतियाबिंद के मरीजों को बाहर से लेंस खरीदने के लिए मजबूर किया जा ...और पढ़ें

गोरखपुर एम्स। जागरण

गोरखपुर एम्स। जागरण

HighLights

  1. एम्स नेत्र विभाग में बाहर से लेंस बेचने का आरोप।

  2. मोतियाबिंद मरीजों को 11 से 75 हजार के लेंस बेचे जा रहे।

  3. फेको मशीन खराब, 200 से अधिक मरीज परेशान।

दुर्गेश त्रिपाठी, गोरखपुर। एम्स के नेत्र रोग विभाग में लेंस बेचा जा रहा है। आप सवाल करेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है, डाक्टर कैसे लेंस बेचते होंगे। हम बताते हैं, लेंस बेचने का तरीका। मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने पहुंचे लोगों को अच्छे गुणवत्ता का लेंस लगाने की सलाह दी जाती है। जब वह इसका रेट पूछते हैं तो छोटी सी पर्ची पर मोबाइल नंबर लिखकर दे दिया जाता है।

दैनिक जागरण ने रोगी को मिले मोबाइल नंबर पर फोन किया तो खेल उजागर हो गया। फोन काल रिसीव करने वाले ने बताया कि हमारे पास 11 हजार रुपये से लगायत 75 हजार रुपये तक का लेंस है। आप रुपये जमा करेंगे तो हम सीधे आपरेशन के दिन डाक्टर के पास पहुंचा देंगे।

एम्स के नेत्र रोग विभाग में रोगियों को लेंस खरीदने के लिए पर्ची थमाना कोई नई बात नहीं है। हमेशा पर्ची दी जाती है लेकिन इस बार तो हद हो गई है। फेको मशीन कई दिनों से खराब है लेकिन फिर भी पर्ची दी जा रही है। इस पर्ची को बात करने के बाद बताया जा रहा है कि जैसे ही मशीन ठीक होगी, लेंस लगा दिया जाएगा।

कई दिनों से खराब है फेको मशीन
एम्स के नेत्र रोग विभाग में एक ही फेको मशीन है। यह मशीन भी कई दिनों से खराब है। कोई बताता है कि चार-पांच दिन में बन जाएगी तो कोई बताता है कि 10 दिन लग जाएंगे। बुधवार को दैनिक जागरण ने पड़ताल की तो कई ऐसे लोग मिले जो आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण एम्स में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने आए थे। यह लोग कम से कम रुपये खर्च करना चाहते थे लेकिन इनको भी मोबाइल नंबर थमा दिया गया। बताया गया कि लेंस खरीदकर लगवाओगे तो ज्यादा दिन तक स्पष्ट दिखेगा।

जो सवाल-जवाब करता उसे अमृत फार्मेसी का रास्ता दिखाते
ओपीडी में आने वाले रोगियों को लेंस लगाने की सलाह देने के साथ ही मोबाइल नंबर दे दिया जाता है। यदि कोई लेंस की गुणवत्ता और खर्च को लेकर सवाल करता है तो उसे अमृत फार्मेसी का रास्ता दिखा दिया जाता है। साथ ही बताया जाता है कि कम रेट वाले लेंस की गुणवत्ता की जिम्मेदारी रोगी की होगी।

मामला आंख का होता है इसलिए ज्यादातर समझौता कर ज्यादा रुपये खर्च करते हैं। हालांकि ज्यादा रुपये में जो लेंस आता है, वह सीधे डॉक्टर के पास जाता है। राेगी को यह भी नहीं पता चलता कि आपरेशन थियेटर में उसे कौन सा लेंस लगाया गया है।

23 दिन में चार चक्कर लगा चुका हूं
कुशीनगर जिला के हाटा के रहने वाले 68 वर्षीय राजेंद्र को दाईं आंख से कम दिखता है। 12 जनवरी को पत्नी के साथ एम्स के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में पहुंचे। आंख में दवा डालकर कुछ देर बाद जांच की गई। इसके बाद दूसरे दिन आने को कहा गया। दुबारा आए तो लेंस की जांच की गई। फिर बताया गया कि दाईं आंख में मोतियाबिंद है। ऑपरेशन करना पड़ेगा।

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28 जनवरी को आए तो चार फरवरी को बुलाया गया। चार फरवरी को आए तो 10 मार्च को आपरेशन का डेट मिला है। कई जगह दौड़ने के बाद अब फिर इंतजार करना पड़ेगा। जूनियर डाक्टर बता रहे हैं कि अभी मशीन खराब है, आपको फोन किया जाएगा। फिर कर्मचारी एक छोटे कागज पर मोबाइल नंबर लिखकर दे दिया। कहा कि यदि जल्द आपरेशन कराना है तो इस नंबर पर काल कर लीजिएगा। अच्छी गुणवत्ता का लेंस भी मिल जाएगा और तत्काल आपरेशन भी हो जाएगा। एम्स में अच्छी गुणवत्ता का लेंस नही मिलता है।

जुगाड़ लगाया तो डेट मिला, अब बताया मशीन खराब है
नौसढ़ के रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता 67 वर्षीय रमाशंकर उपाध्याय ने दिसंबर में नेत्र रोग विभाग में दिखाया। उनकी आंख से कम दिखाई देता है। आंख दवा डालने के बाद डाक्टर ने कुछ जांच कराकर आने को कहा। जांच रिपोर्ट दिखाने पर बताया गया कि मोतियाबिंद है। आपरेशन करना पड़ेगा। इसके लिए बहुत लंबा डेट मिल रहा था। जुगाड़ लगाने के बाद तीन फरवरी का डेट मिला। एम्स पहुंचा तो बताया गया कि फेको मशीन खराब है। जब मशीन बन जाएगी तो जानकारी दी जाएगी। इतने बड़े एम्स में सिर्फ एक मशीन होना भी अपने आप में सवाल है।

दो सौ से ज्यादा कर रहे इंतजार
एम्स के नेत्र रोग विभाग में इस समय दो सौ से ज्यादा रोगी मोतियाबिंद का आपरेशन कराने के इंतजार में हैं। रोजाना 20 से ज्यादा रोगियों को आपरेशन के लिए चिह्नित किया जाता है और सभी को मोबाइल नंबर थमा दिया जाता है।

एम्स खुद लेंस की खरीद करता है। इसके साथ ही अमृत फार्मेसी में भी लेंस उपलब्ध है। रोगी के अनुरोध पर हम लेंस की गुणवत्ता के बारे में बता सकते हैं लेकिन यदि किसी का मोबाइल नंबर दिया जा रहा है तो यह गलत है। अभी दिल्ली में हूं। इसके बारे में जानकारी करूंगी। एक फेको मशीन खरीदी जा रही है। जो मशीन खराब है उसे गुरुवार को ठीक करा दिया जाएगा।

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-डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स