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Antibiotics Awareness: कब लेनी है एंटीबायोटिक्स? डॉक्टरों ने दी सलाह

Published: Fri, 06 Feb 2026 10:44 AM (IST)

चिकित्सक जटिल बीमारियों में ही एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि अस्पतालों में वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम के ...और पढ़ें

अस्पतालों में इन दिनों वायरल फीवर और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या है अधिक. Concept Photo

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जागरण संवाददाता, हरिद्वार । सर्दी के मौसम में जिले के अस्पतालों में वायरल बुखार, जुकाम व गले दर्द के मरीज अधिक आ रहे हैं। उप जिला मेला अस्पताल के चिकित्सक जटिल बीमारियों में ही एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दे रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बिना टेस्ट के एंटीबायोटिक्स से बैक्टीरिया प्रतिरोधी हो जाते हैं। ऐसे में जटिल बीमारियों में ही एंटीबायोटिक्स लिखी जाती हैं।

उप जिला मेला अस्पताल की ओपीडी में गुरुवार को करीब 250 मरीज पहुंचे। इनमें अधिकतर बुखार और सर्दी-जुकाम के मरीज ही अधिक थे।

बुखार से पीड़ित सुरेंद्र (45) ने बताया कि तीन दिन से सर्दी-जुकाम व हल्का बुखार था। डाक्टर ने पर्चे पर कौन सी दवाई लिखी है, इसकी जानकारी नहीं है। पर्चे में लक्षण आधारित उपचार के लिए पैरासिटामोल और सिटराजिन दवा लिखी थी।

राजेश कुमार (32) ने बताया कि गले में खराश व हल्की खांसी की समस्या कई दिनों से बनी हुई है। पहले एक मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। उनके पर्चे पर कफ सिरप लिखा था।

रानी देवी (28) ने बताया कि उनके तीन वर्षीय बेटे को को बुखार था। चिकित्सक की सलाह पर जांच कराई तो सामान्य वायरल संक्रमण की पुष्टि हुई।

उप जिला मेला अस्पताल के फिजीशियन डा. मनीष कुमार ने बताया कि इन दिनों मौसम में परिवर्तन हो रहा है। 80 प्रतिशत मरीज बुखार और सर्दी-जुकाम के आ रहे हैं। सामान्य बीमारी में मरीज को एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह नहीं दी जाती है। टेस्ट से बीमारी की जटिलता कंफर्म करने के बाद ही दवा लिखी जाती है। जटिल बीमारी होने पर ही एंटीबायोटिक्स लिखी जाती हैं।

यहां तो हर बीमारी पर दी जा रही एंटीबायोटिक की हैवी डोज

रुड़की: रुड़की शहर में अधिकांश चिकित्सक से लेकर झोलाछाप एवं मेडिकल स्टोर संचालक मरीजों को उच्च क्षमता की एंटी बायोटिक दवा दे रहे हैं। यह दवा तत्काल लाभ तो दे रही हैं, लेकिन मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर रही हैं। बाद में हल्के से सर्दी-जुकाम में भी यह दवा बेसअर साबित होती हैं।

इन दिनों देशभर में एंटी बायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ओर से गंभीर चेतावनी दी जा रही है। रुड़की शहर की बात की जाए तो यहां मरीज को दी जाने वाली कुल दवा में 75 प्रतिशत एंटी बायोटिक होती है, वह भी अधिक उच्च छमता की। जल्द ठीक करने के चक्कर में हैवी डोज मरीज को नुकसान पहुंचा रही है।

रुड़की स्थित आइएमए अध्यक्ष डा. सुशील नागर की माने तो रुड़की शहर में बड़ी मात्रा में इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि झोला छाप एवं मेडिकल स्टोर से भी एंटी बायोटिक दवा दी जा रही हैं। कई बार उनके पास जब मरीज आता है तो बताता है कि जख्म को सुखाने के लिए उसने मेडिकल स्टोर से एंटी बायोटिक ले ली थी लेकिन जब जांच की जाती है तो उसकी हालत बेहद खराब हो जाती है। उस पर दवा भी असर नहीं करती है।

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