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Antibiotics Awareness चंडीगढ़ में एंटीबायोटिक का आधा कारोबार बिना सलाह, 500 से ज्यादा मेडिकल स्टोरों में चल रहा खेल

Published: Thu, 05 Feb 2026 07:44 PM (IST)

चंडीगढ़ में 500 से अधिक मेडिकल स्टोरों पर एंटीबायोटिक का आधा कारोबार बिना डॉक्टर की सलाह के हो रहा है। ...और पढ़ें

बुखार, खांसी, पेट दर्द या मामूली संक्रमण में भी हाई पावर एंटीबायोटिक का सेवन आम होता जा रहा(

बुखार, खांसी, पेट दर्द या मामूली संक्रमण में भी हाई पावर एंटीबायोटिक का सेवन आम होता जा रहा(

HighLights

  1. गलत डोज और अधूरा कोर्स कर रहा दवाओं को बेअसर।

  2. लोग खुद डॉक्टर बन गलत खुराक से बढ़ा रहे एएमआर खतरा।

  3. हर दिन शहर में पांच से छह लाख रुपये की बिक रही एंटीबायोटिक दवाएं।

मोहित पांडे्य, चंडीगढ़। मामूली बुखार, खांसी या दर्द में एंटीबायोटिक दवा लेना अब आम आदत बनती जा रही है। शहर में हर दिन पांच से छह लाख रुपये की एंटीबायोटिक दवाएं बिक रही हैं, लेकिन यह जल्दबाजी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है।

500 से अधिक मेडिकल स्टोरों पर बिकने वाली दवाओं में करीब 50 प्रतिशत हिस्सा एंटीबायोटिक का है, जबकि इनकी बड़ी मात्रा बिना डाॅक्टर की सलाह के बेची और ली जा रही है। हालात यह हैं कि शहर में हर दिन पांच से छह लाख रुपये की एंटीबायोटिक दवाएं बिक रही हैं, जो सीधे तौर पर एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एमआरआर) को बढ़ावा दे रही हैं।

चिंताजनक बात यह है कि बड़ी संख्या में लोग अब खुद ही डाक्टर बन बैठे हैं। कोई इंटरनेट पर लक्षण सर्च कर दवा ले रहा है तो कोई मेडिकल स्टोर संचालक की सलाह पर एंटीबायोटिक खा रहा है। बुखार, खांसी, पेट दर्द या मामूली संक्रमण में भी हाई पावर एंटीबायोटिक का सेवन आम होता जा रहा है। इसका सीधा असर मरीज की सेहत के साथ-साथ भविष्य के इलाज पर पड़ रहा है।

डाक्टरों के अनुसार एंटीबायोटिक का कोर्स तीन से पांच दिन का लिखा जाता है, लेकिन अधिकांश मरीज या तो आराम मिलते ही दवा छोड़ देते हैं या फिर जरूरत से ज्यादा दिन तक खाते रहते हैं। कई मरीज पुरानी पर्ची के आधार पर बार-बार वही दवा ले लेते हैं। यह लापरवाही बैक्टीरिया को मजबूत बना देती है, जिससे भविष्य में दवाएं असर करना बंद कर देती हैं।

सर्जरी के समय काम नहीं करती दवा, बढ़ जाता है जोखिम

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जरूरत और गलत तरीके से ली गई एंटीबायोटिक आगे चलकर गंभीर खतरा बन सकती है। कई मामलों में देखा गया है कि ऐसे मरीजों को सर्जरी के दौरान हाई रिस्क एंटीबायोटिक तक काम नहीं करती, जिससे संक्रमण और जान का खतरा बढ़ जाता है।

 


कई मरीज डाॅक्टर और ओपीडी फीस बचाने के चक्कर में पुरानी पर्ची पर ही एंटीबायोटिक खरीद लेते हैं। कई दवाएं ऐसी होती हैं जिनका केवल एक डोज लेना होता है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग दो से तीन बार सेवन कर लेते हैं, जिससे फायदा होने की बजाय नुकसान हो जाता है। -प्रिंस भंडुला, मेडिकल स्टोर संचालक।



बिना डाॅक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना बेहद खतरनाक है। इलाज की शुरुआत हमेशा कम पावर की दवाओं से की जाती है। जरूरत पड़ने पर ही पावर बढ़ाई जाती है, लेकिन लोग सीधे हाई पावर एंटीबायोटिक ले लेते हैं। यह लापरवाही भविष्य में जानलेवा साबित हो सकती है। -डाॅ. संजीव भाटिया।