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सुरेंद्र कोली सुसाइडः जेल से लड़ी जीने की लड़ाई, सवाल फिर वही आखिर क्यों की आत्महत्या

Published: Sat, 19 Sep 2026 08:54 PM (IST)

लगभग 20 साल जेल में रहने के बाद सुरेंद्र कोली ने आरटीआई को हथियार बनाकर सुप्रीम कोर्ट से बरी होकर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. कोली ने 20 साल जेल में रहकर आरटीआई से लंबी लड़ाई लड़ी।

  2. सुप्रीम कोर्ट से बरी होकर हरिद्वार में चाय की दुकान खोली।

  3. जीने की इच्छा के बावजूद उसकी आत्महत्या का सवाल गहराया।

जागरण संवाददाता, हरिद्वार। बच्चों के अपहरण कर उनके साथ घिनौना कार्य और मांस पकाकर खाने जैसे अति गंभीर व संवेदनशील आरोप में लगभग 20 साल जेल में रहने के बाद भी सुरेंद्र कोली ने जीने की लालसा नहीं छोड़ी। उसने जेल में रहकर सूचना के अधिकार को हथियार बनाकर लंबी लड़ाई लड़ी।

मेहनत सफल होने पर सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ तो गांव में परिवार के सामाजिक बहिष्कार, मां की मौत, पत्नी-बच्चों के बिछड़ने तक की सभी बुरे घटनाक्रम भुलाकर उसने नौकरी व काम धंधा कर फिर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का प्रयास किया।

इससे साफ कि उसके अंदर जिजीविषा यानि जीने की अदम्य इच्छा कायम थी। सवाल फिर वहीं आकर रुक जाता है कि फिर उसने आत्महत्या क्यों की। कोली के परिचित नारायण सिंह रावत बताते हैं कि कोली ने जेल से आरटीआई में सूचना मांगी कि उसके जेल जाने के बाद नोएडा से कितने बच्चे लापता हुए हैं।

अच्छी खासी संख्या प्राप्त होने पर उसने सुप्रीम कोर्ट में खुद यह दलील दी कि यदि वह बच्चों के अपहरण में शामिल रहा है तो उसके जेल जाने के बाद बच्चों के अपहरण की घटनाएं क्यों नहीं रुकी। उसका तर्क था कि बच्चों के अपहरण में कोई और शामिल है। सर्वोच्च न्यायलय से कोली के इस तर्क पर गंभीरता से विचार किया था।

धर्मेंद्र की मां से बंधवाई थी राखी

हरिद्वार में कोली के मददगार बने धर्मेंद्र कौशिक बताते हैं कि सदाराम का व्यवहार बिल्कुल गाय जैसा था। अपने से छोटों को भी हाथ जोड़कर नमस्कार करता था।

कोली ने धर्मेंद्र की मां से रक्षाबंधन पर राखी बंधाई। मामा होने के नाते वह धर्मेंद्र कौशिक को शराब पीने से भी मना करता था। रक्षाबंधन पर तो उसने धर्मेंद्र को अपने सिर की कसम देकर शराब न पीने का वचन लिया था।

दिल्ली से चेन्नई तक भटकता रहा कोली

सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली दिल्ली से लेकर चंडीगढ़, चेन्नई आदि शहरों में भटकता रहा। दिल्ली के मालवीय नगर में रहने के दौरान कुछ अधिवक्ता उसे चेन्नई ले गए। जहां चर्च की गौशाला में गायों की सेवा करने में लगा दिया।

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उस दौरान भी कोली अल्मोड़ा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण रावत के संपर्क में रहा। गौशाला में ज्यादा काम कराने से वह परेशान हो गया और नारायण रावत के कहने पर वहां से आ गया।

उसे मालूम था कि हरिद्वार में जल्द ही अर्द्धकुंभ होने वाला है, इसलिए कोली लगभग सवा महीने पहले हरिद्वार आया और वॉचमैन की नौकरी की। सिडकुल में चाय की ठेली भी लगाई और बीते छह सितंबर को भूपतवाला में चाय की दुकान शुरू की थी।

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