अखाड़ा परिषद ने किया एलान, हरिद्वार में लिखा जाएगा श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष का नया इतिहास
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज ने घोषणा की है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि कार सेवा की तिथि अर्धकुंभ और कुंभ मेलों के बाद तय की जाएगी।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्रपुरी बोले : संत समाज की सहमति से होगा अगला निर्णय।

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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (निरंजनी) ने बड़ा एलान किया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन को अगले वर्ष होने वाले अर्धकुंभ और कुंभ मेलों के बाद निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
हरिद्वार, अर्धकुंभ व नासिक और उज्जैन कुंभ मेलों के बाद विशाल संत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसमें संत समाज से व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा और सर्वसम्मति बनने के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि कार सेवा की तिथि घोषित की जाएगी। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद ने अभी कार सेवा की कोई तिथि घोषित नहीं की है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष व्यापक धार्मिक अभियान
शनिवार को निरंजनी अखाड़े में संतों के साथ विचार-विमर्श के दौरान श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष केवल किसी एक संस्था या क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि संत समाज से जुड़ा व्यापक धार्मिक अभियान है।
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देशभर के संतों को इससे जोड़ने के लिए लगातार मुहिम चलाई जा रही है और आमजन को भी जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष हरिद्वार में अर्धकुंभ, जिसके बाद नासिक कुंभ और 2028 में उज्जैन में कुंभ मेले का आयोजन होना है।
देशभर के अखाड़े और संत समाज इन आयोजनों की तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में अभी पूरा ध्यान अर्धकुंभ और कुंभ की व्यवस्थाओं पर है। अर्धकुंभ व कुंभ मेले संपन्न होने के बाद संतों की बड़ी बैठक बुलाई जाएगी। इसमें आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा के साथ कार सेवा की तिथि पर भी निर्णय लिया जाएगा।
श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर आंदोलन को सफलता तक पहुंचाने में संत समाज की सक्रिय भूमिका रही है और रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने का सपना साकार हुआ है। उसी भावना और संत समाज की सहभागिता के साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों के संतों और धार्मिक संगठनों से संवाद किया जा रहा है। कार सेवा का निर्णय भी संत समाज की सामूहिक सहमति से ही लिया जाएगा।
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इस दौरान भारत माता मंदिर के श्रीमहंत एवं महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद, महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती, महंत राज गिरी सहित कई संत-महंत उपस्थित रहे।
