हरीश रावत ने हरिद्वार में किया गंगा पूजन... भावुक होकर बताई दिल की ख्वाहिश, बोले - 'अंतिम यात्रा...'
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार में गंगा पूजन के बाद अपनी हार्दिक इच्छा व्यक्त की कि उनकी अंतिम यात्रा हरिद्वार के प्रतिनिधि के रूप में निकले।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत.

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, हरिद्वार। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचे। हरकी पैड़ी पर मां गंगा का विधि-विधान से पूजन किया और आशीर्वाद लिया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने राजनीतिक मुद्दों के साथ ही अपने व्यक्तिगत जीवन की आकांक्षाओं और देश की संवैधानिक संस्थाओं को लेकर अपनी बात रखी।
गंगा पूजन के बाद पत्रकारों से वार्ता के दौरान हरीश रावत भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनके मन की हार्दिक इच्छा है कि जब जीवन का अंतिम समय आए और उनकी अंतिम यात्रा निकले तो वह हरिद्वार के प्रतिनिधि के रूप में ही निकले।
हालांकि आगामी चुनाव में दावेदारी अथवा चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका निर्णय उस समय की परिस्थितियों, समय, स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए ही होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरिद्वार के प्रतिनिधि के रूप में अंतिम यात्रा निकलने की बात उनकी व्यक्तिगत इच्छा है। इस दौरान कांग्रेस नेता महेश प्रताप राणा, रवीश भटीजा, दीपक टंडन समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसजन शामिल रहे।
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मुख्यमंत्री की सराहना को बताया शिष्टाचार
मुख्यमंत्री की ओर से हाल में की गई सार्वजनिक सराहना के सवाल पर रावत ने सौहार्दपूर्ण प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का शिष्टाचार, सौम्यता और बड़प्पन है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान और शिष्टाचार बनाए रखना भारतीय लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
वार्ता के दौरान हरीश रावत ने देश की संवैधानिक संस्थाओं, विशेषकर चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले दो-तीन वर्षों से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्वतंत्रता को लेकर आवाज उठाते रहे हैं।
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रावत ने दावा किया कि हाल में दो वर्तमान चुनाव आयुक्तों के बयानों और रुख से राहुल गांधी की ओर से उठाई गई चिंताओं की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संस्थाओं की साख और निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक विषय है। रावत ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
