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हरिद्वार की इन चार सीटों पर SIR से बदला सियासी कैनवास, अब बूथों की कहानी तय करेगी राजनीतिक दलों की सियासत

Published: Sun, 04 Oct 2026 06:02 PM (IST)

हरिद्वार जिले की चार विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) ने सियासी गणित बदल दिया है। ...और पढ़ें

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शैलेंद्र गोदियाल, जागरण हरिद्वार। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने में राजनीतिक पार्टियों के दावेदार दमखम से जुटे हैं, परंतु हरिद्वार जिले की चार महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची के प्री एवं विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने सियासी गणित की पुरानी तस्वीर बदल दी है।

ऐसे में हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर, रुड़की और हरिद्वार ग्रामीण इन चारों सीटों पर अब राजनीतिक दलों को 2022 के बूथवार समीकरणों के बजाय एसआइआर के बाद तैयार हुए नए मतदाता आधार के साथ चुनावी रणनीति बनानी होगी।

मार्च 2024 की मतदाता सूची के मुकाबले चारों सीटों सीटों पर कुल 134249 मतदाता कम हुए हैं। खास बात यह है कि 2022 में इन चारों सीटों पर जीत का अंतर अलग-अलग रहा, हरिद्वार में 15237, रानीपुर में 13862, हरिद्वार ग्रामीण में 4472 और रुड़की में महज 2277 वोट।

यानी कहीं मजबूत बढ़त थी तो कहीं मुकाबला बेहद करीबी। ऐसे में अब राजनीतिक दलों के लिए की नई सियासी परीक्षा होगी। इन आंकड़ों का राजनीतिक महत्व इसलिए बढ़ जाता है कि 2022 में तीनों सीटों की चुनावी तस्वीर एक जैसी नहीं थी।

हरिद्वार में भाजपा के मदन कौशिक ने कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी को 15237 मतों से हराया था। बीएचईएल रानीपुर में भाजपा के आदेश चौहान ने कांग्रेस के राजबीर सिंह चौहान पर 13862 मतों से जीत दर्ज की थी।

इसके उलट हरिद्वार ग्रामीण में कांग्रेस की अनुपमा रावत ने भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद को महज 4472 मतों से शिकस्त दी थी। रुड़की में भाजपा के प्रदीप बत्रा ने कांग्रेस के यशपाल राणा को सिर्फ 2277 वोटों से हराया था। बत्रा को 36986 और राणा को 34709 वोट मिले थे।

हरिद्वार, रानीपुर और रुड़की में पिछले चुनाव में भाजपा की बढ़त अपेक्षाकृत बड़ी थी, वहीं ग्रामीण सीट का मुकाबला काफी करीबी रहा। अब एसआइआर के बाद तीनों सीटों पर मतदाता आधार बदलने से राजनीतिक दलों को पुराने बूथवार समीकरणों की दोबारा कसरत करनी पड़ेगी।

सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि सूची से बाहर हुए मतदाताओं में कितने स्थानांतरित, मृत, अनुपलब्ध अथवा अन्य कारणों से हटाए गए हैं और कितने पात्र मतदाता फिर से सूची में शामिल हुए हैं। इसलिए अभी मतदाताओं की संख्या घटने को किसी दल के पक्ष या विपक्ष में जाना मानना राजनीतिक रूप से जल्दबाजी होगी।

लेकिन राजनीतिक दलों की चिंताएं इससे जरूर बढ़ गई हैं। राजनीतिक दलों को पुराने चुनावी आंकड़ों के भरोसे मैदान में उतरना आसान नहीं होगा। अब राजनीतिक दलों को बूथवार यह देखना होगा कि किस क्षेत्र में कितने नाम घटे, कितने नए मतदाता जुड़े, किस सामाजिक समूह का मतदाता आंकड़ा बदला और 2022 में इन क्षेत्रों में मतदान का रुझान क्या था।

खासकर हरिद्वार ग्रामीण और रुड़की जैसी करीबी सीट पर कुछ हजार मतदाताओं का बदलाव भी चुनावी तस्वीर पर असर डाल सकता है। इसी तरह से हरिद्वार शहर और बीएचईएल रानीपुर की सीट पर जो 2022 में जीत हार के अंतर आंकड़ों की तुलना में तीन गुना मतदाताओं की संख्या कम हुई। इस का प्रभाव किस पर पड़ेगा यह 2027 की सियासी कहानी तय करेगा।

आंकड़ों में चार सीटों का बदला चुनावी कैनवास

विधानसभा 2024 एसआईआर के बाद कमी कमी प्रतिशत (%)
हरिद्वार 1,54,897 1,09,666 45,231 29.2
रानीपुर 1,77,249 1,31,907 45,342 25.6
हरिद्वार ग्रामीण 1,38,793 1,23,157 15,636 11.3
रुड़की 1,18,426 90,619 28,040 23.4
 
2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर जीत-हार का अंतर
 
विधानसभा सीट जीत-हार का अंतर (वोट) विजेता प्रत्याशी उपविजेता प्रत्याशी
हरिद्वार 15,237 मदन कौशिक (BJP) सतपाल ब्रह्मचारी (INC)
बीएचईएल रानीपुर 13,862 आदेश चौहान (BJP) राजबीर सिंह (INC)
हरिद्वार ग्रामीण 4,472 अनुपमा रावत (INC) स्वामी यतीश्वरानंद (BJP)
रुड़की 2,277 प्रदीप बत्रा (BJP) यशपाल राणा (INC)

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