हरिद्वार में रेडियो कॉलर लगाने के दौरान हाथी की मौत, हृदय रोग बना कारण
हरिद्वार में रेडियो कॉलर लगाने के लिए बेहोश किए गए 55 वर्षीय हाथी की उपचार के दौरान मौत हो गई। ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता हरिद्वार। आबादी से हाथी की दूरी बनाने और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश आखिरकार उसी के लिए जानलेवा साबित हो गई। जिस हाथी को रेडियो कालर पहनाकर उसकी निगरानी करने की तैयारी थी, वह बेहोशी की दवा का असर भी नहीं झेल सका।
करीब 55 वर्षीय हाथी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम में उसके हृदय में गंभीर विकार सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अत्यधिक उम्र के इस हाथी को बेहोश करने से पहले उसके स्वास्थ्य और हृदय की स्थिति का पर्याप्त आकलन किया गया था।
दरअसल, हरिद्वार वन प्रभाग में नियमित निगरानी के दौरान एक वृद्ध हाथी की गतिविधियां हरिद्वार नगर और आसपास की आबादी के बेहद करीब पाई गई थीं। यह हाथी अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों और कृषि भूमि में विचरण करता था। कई बार वह नगर क्षेत्र की ओर भी पहुंच जाता था।
मानव-हाथी संघर्ष की आशंका और अर्धकुंभ मेला-2027 के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए वन विभाग ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रेडियो कॉलर लगाने का निर्णय लिया था।
इसी कड़ी में बीते शुक्रवार को भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के विशेषज्ञों, वन्यजीव पशु चिकित्सकों और वन विभाग की संयुक्त टीम ने विशेषज्ञों की देखरेख में हाथी को बेहोश करने के लिए इंजेक्शन दिया।
लेकिन प्रक्रिया के दौरान ही उसकी तबीयत बिगड़ गई। टीम ने तत्काल ऑक्सीजन, सीपीआर, निर्धारित दवाओं और नसों के जरिये तरल पदार्थ देकर उसे बचाने का प्रयास किया। बेहोशी की दवा का असर समाप्त करने के लिए भी प्रतिरोधी दवा दी गई, लेकिन तमाम कोशिशें नाकाम रहीं।
घटना के बाद स्वतंत्र पशु चिकित्सक विशेषज्ञ समिति ने हाथी का पोस्टमार्टम किया। इसमें उसकी उम्र करीब 55 वर्ष आंकी गई। जांच में हृदय की मांसपेशियों में रेशेदार बदलाव (मायोकार्डियल फाइब्रोसिस) और हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित करने वाले विकार (कार्डियोमायोपैथी) पाए गए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अत्यधिक वृद्धावस्था से जुड़े इन विकारों के चलते हाथी बेहोशी की प्रक्रिया के दौरान पैदा हुए शारीरिक तनाव को सहन नहीं कर सका। वन विभाग ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हाथी को बचाने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं और अनुभवी पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने हरसंभव प्रयास किए।
हालांकि, इस घटना ने वन्यजीवों की निगरानी के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी अधिक उम्र के हाथी को बेहोश करने से पहले हृदय संबंधी जोखिमों की जांच होनी चाहिए थी। फिलहाल, एक हाथी की मौत के साथ कई सवाल भी वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने खड़े हैं।
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