खेत से विदेश तक पहुंचेगा हरिद्वार का बासमती, 40 हेक्टेयर रकबा में महक रही पूसा की खुशबू
हरिद्वार में किसानों की आय बढ़ाने के लिए 40 हेक्टेयर में पूसा बासमती चावल की खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है।


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अनुज कटारिया, रुड़की। किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक धान की खेती को अधिक लाभकारी फसल से जोड़ने की दिशा में हरिद्वार जिले में नई पहल शुरू हुई है। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र के पायलट प्रोजेक्ट के तहत अब भगवानपुर और बहादराबाद ब्लॉक में बासमती चावल का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
कृषि विभाग ने दोनों ब्लॉकों में कुल 40 हेक्टेयर रकबे में पूसा बासमती की किस्म का धान लगाने के लिए किसानों को जोड़ा है। खास बात यह है कि किसानों को जिला योजना के बजट से बीज निशुल्क उपलब्ध कराया गया है। पहले चरण में 87 किसानों को परियोजना से जोड़ा गया है।
फसल तैयार होने के बाद उत्पाद को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। इसके लिए रीप परियोजना के सहयोग से बासमती चावल को विदेशों में निर्यात करने की दिशा में काम किया जाएगा। वहीं जिले और आसपास के क्षेत्रों की स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए भी बासमती के उत्पादन का दायरा आगे बढ़ाया जाएगा। कृषि विभाग के अनुसार पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम बेहतर रहने पर आने वाले समय में इसमें और किसानों को शामिल किया जाएगा।
मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी ने बताया कि परियोजना के तहत बहादराबाद ब्लॉक में लालढांग, श्यामपुर और गैंडीखाता क्षेत्र के 56 किसानों को शामिल किया गया है। इन किसानों के माध्यम से करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती का उत्पादन किया जा रहा है।
वहीं भगवानपुर ब्लॉक के खुब्बनपुर और अलावलपुर गांव के 31 किसानों को 20 हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादन के लिए जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि दोनों ब्लॉकों में बासमती धान की पूसा बासमती 1718 किस्म को लगाया गया है। किसानों को करीब छह-छह कुंतल के हिसाब से बीज उपलब्ध कराया गया है। खेतों में बासमती धान की रोपाई का काम भी शुरू हो चुका है। कृषि विभाग अब फसल की निगरानी से लेकर उत्पादन और आगे की मार्केटिंग व्यवस्था तक किसानों का सहयोग करेगा।
किसान से सीधे बाजार और फिर विदेश तक पहुंचाने की तैयारी
इस परियोजना का उद्देश्य केवल किसानों को बासमती की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उत्पादन के बाद उसे बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी है। सामान्य तौर पर किसानों को फसल तैयार होने के बाद स्थानीय मंडी या आढ़तियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऐसे में यदि बासमती की गुणवत्ता बनाए रखते हुए किसानों को संगठित बाजार और निर्यात की सुविधा मिलती है तो उनकी आमदनी में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। योजना के तहत फसल तैयार होने के बाद रीप परियोजना के सहयोग से निर्यात की संभावनाएं तलाशने की तैयारी है। इससे हरिद्वार के किसानों की उपज को राष्ट्रीय बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है।
सात राज्यों में आता है बासमती का जीआई क्षेत्र
बासमती को केवल देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी खास पहचान हासिल है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार भारत में बासमती का जीआई क्षेत्र उत्तराखंड समेत पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 30 जिलों और जम्मू-कश्मीर के तीन जिलों तक फैला है।
यानी हरिद्वार में बासमती उत्पादन के विस्तार के लिए भौगोलिक पहचान के लिहाज से भी आधार मौजूद है। एपीडा के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 65.2 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब 50,138 करोड़ रुपये यानी 5.67 अरब अमेरिकी डॉलर रही। यह आंकड़ा बताता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती की मांग कितनी बड़ी है।
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गुणवत्ता पर रहेगा जोर
खास बात ये है कि इस फसल में जैविक खाद का प्रयोग करने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल बहादराबाद ब्लाॅक में इसे प्रयोग किया जाएगा। उदाहरण के लिए सऊदी अरब को निर्यात करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए खाद्य सुरक्षा प्रबंधन के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन जरूरी है।
ऐसे में कृषि विभाग का पायलट प्रोजेक्ट उत्पादन के साथ किसानों को गुणवत्ता आधारित खेती और बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यदि पहले चरण में उत्पादन और विपणन के अच्छे परिणाम सामने आते हैं तो भगवानपुर और बहादराबाद के साथ जिले के अन्य क्षेत्रों में भी बासमती का रकबा बढ़ाया जा सकता है।
स्थानीय बाजार की मांग भी होगी पूरी
मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी ने बताया कि योजना का लक्ष्य केवल विदेशों में निर्यात करना नहीं है। स्थानीय स्तर पर भी बासमती चावल की मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने की योजना है। इससे स्थानीय बाजार में उत्पाद की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर की मंडियों पर निर्भरता कम हो सकती है।
शासन की मंशा किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है। इसी उद्देश्य से बासमती उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को बेहतर किस्म का बीज उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन के बाद बाजार और निर्यात से जोड़ने पर भी काम किया जाएगा। परियोजना के परिणामों के आधार पर इसका विस्तार किया जाएगा। - डा. ललित नारायण मिश्र, सीडीओ हरिद्वार
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