रुड़की, [जेएनएन]: आइआइटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) रुड़की अन्य संस्थानों के साथ मिलकर हिमालयी क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए कार्य करेगा। साथ ही यहां के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के भी प्रयास किए जाएंगे। ऐसा संभव हो पाएगा डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआइसी) के माध्यम से।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से इस सेंटर के लिए संस्थान को दस करोड़ रुपये का फंड दिया जाएगा। सोमवार को आइआइटी रुड़की के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में डिजाइन इनोवेशन सेंटर के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि डीआइसी का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की समस्याओं का निदान करना है।

इसके लिए क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही राष्ट्र की प्राथमिकताओं का भी ध्यान रखा जाएगा। कहा कि सेंटर का लक्ष्य विशेषकर इस क्षेत्र के लिए उपयुक्त प्रोडक्ट तैयार करना है। जन-जन तक पहुंचने के लिए इसके कुछ अनोखे प्रोग्राम हैं। मसलन कोमल (कॉमन मैन टू लैबरोटरी), जिसके तहत डीआइसी आम लोगों से संपर्क करेगा।

निदेशक के अनुसार डीआइसी हब एंड स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा। इसमें आइआइटी रुड़की हब इंस्टीट्यूट होगा। जबकि, इस क्षेत्र के तीन अन्य मुख्य संस्थान- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखंड, भारतीय प्रबंधन संस्थान काशीपुर और जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर का प्रौद्योगिकी कॉलेज स्पोक की भूमिका निभाएंगे।

बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद आइआइटी दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन के हेड प्रो. पीवीएम राव ने कहा कि डीआइसी के माध्यम से टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर लोगों के जीवन को आसान बनाने में मदद मिलेगी। पर्यावरण से संबंधित समस्याओं का हल करने में भी यह सहायक होगा। एनआइडी (राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान) अहमदाबाद के निदेशक डॉ. प्रद्युम्न व्यास ने कहा कि डीआइसी के जरिए जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद मिलेगी। आइआइटी रुड़की के डीन (स्पांसर्ड रिसर्च एवं इंडस्ट्रीयल कंसल्टेंसी) प्रो. मनोरंजन परिदा ने कहा कि क्षेत्र के दिव्यांगों की जरूरतों को पूरा करना सेंटर की पहली प्राथमिकता होगी। 

इसका मकसद डिजाइन इनोवेशन सेंटर, ओपन डिजाइन स्कूल और नेशनल डिजाइन इनोवेशन नेटवर्क का विकास करना भी है। इस मौके पर संस्थान के डीआइसी को-ऑर्डिनेटर प्रो. अपूर्व कुमार शर्मा, प्रो. रजत अग्रवाल, प्रो. गौरव रहेजा, प्रो. संजीव मनहास, प्रो. इंदरदीप सिंह, प्रो. प्रवींद्र कुमार, प्रो. नागेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।

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