जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Haridwar Kumbh 2021 बैरागी अखाड़ों के संतों ने मेला अधिष्ठान से बैरागी संतों के लिए बैरागी कैंप में भूमि आवंटन की मांग की है। बाबा हठयोगी ने कहा कि जब 10 अखाड़ों की छावनी लग रही है तो वैष्णव संतों की छावनी भी लगनी चाहिए अन्यथा बैरागी संत कहां जाएंगे। रविवार को बैरागी कैंप स्थित अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़े में प्रेस वार्ता में श्री दिगंबर अणि के मेला प्रभारी बाबा हठयोगी ने कहा कि वृंदावन मेले के बाद बड़ी संख्या में वैष्णव संत धर्मनगरी पहुंचेंगे। उनके रहने के लिए मेला अधिष्ठान को जल्द से जल्द भूमि चिह्नित कर प्लॉट आवंटन करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार सुविधाएं देती है तो ठीक अन्यथा खाली भूमि का आवंटन कर दिया जाए। बाकी सभी सुविधाएं वैष्णव संत स्वयं कर लेंगे। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भी वैष्णव संत खुले में रहते थे। कोरोना नियमों को देखते हुए इस बार बैरागी संत अपनी सभी तैयारियां अपने स्तर पर करेंगे।

उन्होंने कहा कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाए, क्योंकि जब खालसा आएंगे तब शिविर अथवा टेंट ना लगने से वह आपस में लड़ेंगे, जो कि मेला प्रशासन के लिए भी मुसीबत बनेगा। इस अवसर पर महंत विष्णु दास, महंत प्रह्लाद दास, महंत दुर्गादास, महंत नारायण दास, पटवारी महंत प्रमोद दास, महंत अगस्त दास, महंत सिंटू दास, महंत अमित दास, महंत रामदास, महंत लोकेशदास, महंत सूरजदास आदि मौजूद रहे।

बैठक में बैरागी संतों के पक्ष में निर्णय लेने की उम्मीद

25 फरवरी को होने वाली अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक को लेकर बाबा हठयोगी ने कहा कि बिना किसी एजेंडे के कोई बैठक संभव नहीं है। 10 दिन पूर्व बैठक का एजेंडा सभी 13 अखाड़ों में सूचना के लिए भेजा जाता है। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि बैठक में किस तरह के प्रस्ताव पारित करेंगे वह अपने आप में सक्षम हैं और बैरागी संतों को आशा है कि कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर ही बैरागी संतों के पक्ष में निर्णय लेंगें।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य ने कहा है कि यदि अखाड़ा परिषद की बैठक बैरागी कैंप में होती है तो ही वैष्णव संत उसमें शामिल होंगे अन्यथा किसी और अखाड़े में बैठक होने पर वैष्णव संत बैठक में भाग नहीं लेंगे, क्योंकि सभी अखाड़ों के कार्य हो रहे हैं और बैरागी संतों की उपेक्षा की जा रही है। इसलिए वैष्णव संत इसे सहन नहीं करेंगे। महामंत्री पद बैरागी अखाड़ों को मिलेगा। तब ही अखाड़ा परिषद की बैठक की जाएगी। निर्मोही अखाड़े के सचिव महंत रामशरण दास महाराज ने कहा है कि बैरागी संतों की उपेक्षा किया जाना भी अखाड़ा परिषद की ही देन है।

उन्होंने कहा कि बैरागी कैंप स्थित रामानंदाचार्य गेट का भी जीर्णोद्धार मेला प्रशासन की ओर से नहीं किया जा रहा है। बैरागी संतों की लगातार उपेक्षा से संतों में गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। मेला प्रशासन यदि समय पर नहीं जागा तो बैरागी संत बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। जिससे संपूर्ण भारत में उत्तराखंड सरकार की छवि धूमिल होगी और इसकी जिम्मेदारी स्वयं उत्तराखंड सरकार और मेला प्रशासन की होगी। इस दौरान उन्होंने बताया कि 27 फरवरी से बैरागी संतों के खालसे हरिद्वार में आगमन करने लगेंगे। प्रशासन को बैरागी कंप क्षेत्र की व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए।

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