देहरादून, जेएनएन। अमेरिका में बाघिन में कोरोना की पुष्टि के बाद देहरादून के चिड़ियाघर में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। यहां परिसर के साथ ही वन्य जीवों का खाना और पानी भी सेनिटाइज किया जा रहा है। वहीं, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में बिजरानी व कालागढ़ में दो आइसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। प्रशासन यहां सोमवार को ही पांच क्वारंटाइन सेंटर भी बना चुका है।

भारतीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने देशभर के चिड़ियाघरों को अलर्ट जारी किया है। इसी क्रम में देहरादून जू में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। यहां कई स्तर पर सेनिटाइजेशन किया जा रहा है। जू के निदेशक पीके पात्रो ने बताया कि वन्य जीवों को भोजन व पानी सेनिटाइज कर दिया जा रहा है। साथ ही कर्मचारियों को भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा स्टाफ को वन्य जीवों से भी दूरी बनाए रखने को कहा गया है। इन दिनों स्टाफ भी काफी कम कर दिया गया है।

जू के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश नौटियाल ने बताया कि जू में कर्मियों की संख्या एक चौथाई कर दी गई है। एनिमल फीड को तीन बार सेनिटाइज किया जा रहा है। बाड़ा कीपर ही भोजन देने जाते हैं अब बायो सिक्योरिटी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

त्रिस्तरीय सेनीटाइजेशन व्यवस्था

जू में आने वाले कर्मचारियों को पहले गेट पर फिर जीवों के करीब जाने पर सेनिटाइज किया जाता है। इसके अलावा जीवों के भोजन के वाहन को सेनिटाइज करने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। इसके बाद मांस और हरे चारे को अलग-अलग सेनिटाइज कर रख दिया जाता है। वहीं, वन्य जीवों को खिलाने से पूर्व इसे पोटेशियम परमेगनेट से धोकर सुखा दिया जाता है।

रेस्क्यू किए वन्यजीव नहीं रखे जाएंगे जू में

अमेरिका के एक चिड़ियाघर में बाघिन के कोरोना संक्रमित होने के बाद जू प्रबंधन सतर्क हो गया है। जू के वन क्षेत्रधिकारी एमएम बैंजवाण ने बताया कि शहरभर में रेस्क्यू किए जाने वाले घायल जानवरों को इलाज के लिए जू लाया जाता था। लेकिन जानवरों में कोरोना संक्रमण के संकट को देखते हुए प्रबंधन ने फैसला लिया है कि लॉकडाउन के दौरान किसी भी रेक्स्यू किए जानवर को जू में नहीं लाया जाएगा।

बगैर डॉक्टर, कैसे मिले वन्यजीवों को उपचार

अमेरिका के ब्रोनेक्स चिड़ियाघर में एक बाघ के कोरोना संक्रमित होने की खबरों के बाद भले ही उत्तराखंड में भी अलर्ट जारी कर दिया गया हो, लेकिन कड़वी हकीकत यह भी है कि यहां वन्यजीवों के उपचार के लिए विभाग के पास पशु चिकित्सकों का भारी टोटा है। विभाग के पास सिर्फ सात पशु चिकित्सक हैं, जो तीन जिलों तक सिमटे हैं। ऐसे में दूसरे जिलों में यदि बेजुबानों को कहीं तत्काल उपचार मुहैया कराना पड़े तो दिक्कतें बढ़ना तय है। इसके दृष्टिगत अब पशु चिकित्सकों की भर्ती की दिशा में विभाग और शासन दोनों ही सक्रिय हुए हैं।

छह नेशनल पार्क, सात अभयारण्य, चार कंजर्वेशन रिजर्व के साथ ही दो बड़े व एक छोटा चिड़ियाघर और दो रेसक्यू सेंटर हैं। इनके लिए महज सात ही पशु चिकित्सक हैं। इनमें राजाजी टाइगर रिजर्व में दो, कार्बेट टाइगर रिजर्व में एक, हरिद्वार के चिड़ियापुर रेसक्यू सेंटर में दो, देहरादून डिवीजन में एक, नैनीताल चिड़ियाघर में एक पशु चिकित्सक की तैनाती है।

अब जबकि बाघ समेत वन्यजीवों में भी कोरोना संक्रमण की खबरें आने के बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने देशभर में अलर्ट जारी किया है तो उत्तराखंड की चुनौती भी बढ़ गई है। 

वन्यजीव विविधता के लिए मशहूर इस राज्य में जंगली जानवरों को उपचार मुहैया कराने की सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि, 16 मार्च से राज्य के सभी चिड़ियाघर, नेशनल पार्क, अभयारण्य, कंजर्वेशन रिजर्व पर्यटकों के लिए बंद हैं, लेकिन प्रदेशभर में पशु चिकित्सकों को साथ लेकर अभियान चलाना पड़े तो इसमें भारी कठिनाई पेश आना तय है। राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजीव भरतरी के मुताबिक केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार राज्य में सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

चिड़ियाघरों में वन्यजीवों की देखभाल में जुटे कर्मचारियों को पूरी सावधानी बरतने को कहा गया है। उन्होंने माना कि विभाग के पास पशु चिकित्सकों की कमी है। इसे देखते हुए पशु चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा जा रहा है।

ट्रैप किए जाएंगे बाघ

न्यूयार्क के चिड़ियाघर में बाघ को कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। एसडीओ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि डीएफओ हल्द्वानी के निर्देश के बाद टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स अभयारण्य में बाघों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। बाघों के सांस लेने के तरीकों एवं उसके मल से स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाएगा। बताया कि नंधौर अभयारण्य में 20 से 30 बाघ हैं। बाघों के स्वास्थ्य में परिवर्तन महसूस होने के बाद इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी। एसडीओ ने बताया कि अभयारण्य में कोई भी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर पाएगा।

आनंद बर्धन (प्रमुख सचिव वन) का कहना है कि विभाग में पशु चिकित्सकों की जरूरत है। इसे देखते हुए प्रतिनियुक्ति, संविदा व सीधी भर्ती से पशु चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे। साथ ही राज्य के संरक्षित-आरक्षित क्षेत्र को देखते हुए इसके आधार पर पशु चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

चिड़ियाघर कर्मियों को रेनकोट

प्रदेश के चिड़ियाघरों में बेजुबानों की देखभाल कर रहे कर्मचारियों को कोरोना से बचाव के दृष्टिगत सेनिटाइजर, ग्लब्स, मास्क दिए गए हैं। साथ ही, सावधानी बरतने को कहा गया है। यही नहीं, अब उन्हें सुरक्षा के मद्देनजर रेनकोट देने पर भी विचार चल रहा है, ताकि वे रेनकोट पहनकर वन्यजीवों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी देखभाल करें।

जिम कॉर्बेट में बनाए गए आइसोलेशन सेंटर

न्यूयार्क में बाघ को कोरोना होने के बाद नेशनल पार्क, जंगल और चिड़ियाघरों प्रशासन अलर्ट हो गए हैं। इस बीच मंगलवार को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में बिजरानी व कालागढ़ में दो आइसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। प्रशासन यहां सोमवार को ही पांच क्वारंटाइन सेंटर भी बना चुका है।

नेशनल पार्क में गश्त करने वाले 17 पालतू हाथियों के महावतों के घर आने-जाने व स्वजनों से मिलने पर भी रोक लगा दी गई है। कॉर्बेट प्रशासन ने हाथियों के लिए बाहर से आने वाले गन्ने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। नेशनल पार्क प्रशासन के अनुसार गश्त करने वाले पालतू हाथियों व स्लीपर डॉग को इस समय कोरोना वायरस से बचाना है। असल में उनके संक्रमित होने से अन्य वन्य जीव भी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में पूरे जिम कॉर्बेट के वन्य जीवों में महामारी फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।

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इसके मद्देनजर कालागढ़, ढिकाला, बिजरानी, झिरना, लालढांग व हल्दूपड़ाव में हाथियों के लिए क्वारंटाइन सेंटर पहले ही बना दिया गया है। यहां के पशु चिकित्सक दुष्यंत शर्मा ने बताया कि हाथियों को संक्रमण से बचाने के लिए महावतों को उनके घर आने-जाने पर रोक लगा दी गई है। परिवार के सदस्य भी महावतों से नहीं मिल पाएंगे। केवल महावत व आवश्यक कर्मी ही हाथी कैंप में प्रवेश करेंगे।

सीटीआर निदेशक राहुल ने बताया कि हाथी कैंप को सेनिटाइज किया गया है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मिनरल्स व विटामिन दिए जा रहे हैं। हाथी जंगल का ही चारा खाएंगे। बाहर से आने वाला कोई भी खुली खाद्य सामग्री नहीं दी जा रही है।

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Posted By: Sunil Negi

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