कौन हैं IFS संजीव चतुर्वेदी? पांच साल में 12 ट्रांसफर... SC और HC समेत रिकॉर्ड 17 जजों ने छोड़ा केस
IFS Sanjeev Chaturvedi Case: आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी रहते हुए 200 से अधिक भ्रष्टाचार ...और पढ़ें

आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
निर्मला बोहरा, उत्तराखंड। Sanjeev Chaturvedi Case: भारतीय वन सेवा (आईएफएस) 2002 बैच के ईमानदार और तेज तर्रार वरिष्ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) रहते हुए उन्होंने 200 से अधिक भ्रष्टाचार के मामलों खुलासा का किया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई किए जाने के कारण पांच साल में 12 बार इनका ट्रांसफर किया गया। आइए विस्तार से इनके बारे में जानते हैं।
बता दें कि आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामलों की सुनवाई से अब तक 17 न्यायाधीश स्वयं को अलग कर लिया है, जो एक रिकॉर्ड है। देश के न्यायिक इतिहास में एक रिकॉर्ड है, क्योंकि इससे पहले कभी भी इतने अधिक न्यायाधीशों ने किसी एक व्यक्ति के मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग नहीं किया है।
अब तक सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश, नैनीताल उच्च न्यायालय के चार न्यायाधीश, अध्यक्ष सहित कैट के नौ न्यायाधीश तथा जिला न्यायपालिका के दो न्यायाधीश, उनके मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके हैं।
यह भी पढ़ें- चर्चित IFS संजीव चतुर्वेदी का मामला: सुनवाई से एक और जज ने खुद को किया अलग, रिकॉर्ड 17 जजों ने छोड़ा केस
क्या था मामला?
संजीव चतुर्वेदी द्वारा आईएफएस अधिकारियों के मूल्यांकन रिपोर्ट चैनल के संबंध में उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के आदेश को चुनौती दी गई है। इसमें उत्तराखंड संवर्ग के भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की एसीआर का चैनल निर्धारित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आदेश आधार बनाया गया था तथा उसके पूर्व के आदेशों के अनुसार प्रमुख वन संरक्षक के रिपोर्टिंग अधिकारी होने की दशा में स्वीकृतिकर्ता अधिकारी पीसीसीएफ रैंक से ऊपर का अधिकारी होना चाहिए, जबकि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार स्वीकृतकर्ता अधिकारी प्रमुख सचिव वन होते हैं, जो लेबल-15 का पद होने के कारण विभागाध्यक्ष से नीचे होता है। विभागाध्यक्ष का पद लेबल-17 का पद है।
इन्होंने छोड़ा केस
- सितंबर-अक्टूबर 2025 में, उत्तराखंड हाई कोर्ट न्यायमूर्ति आलोक वर्मा और न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी ने भी चतुर्वेदी और कैट के न्यायिक सदस्य राजवीर सिंह वर्मा।
- फरवरी 2024 में हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी।
- मई 2023 में न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल।
- अप्रैल 2025 में नैनीताल की एसीजेएम नेहा कुशवाहा।
- फरवरी 2025 में, हरविंदर ओबेरॉय और बी. आनंद की सदस्यता वाली कैट की खंडपीठ।
- नवंबर 2013 में, सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई।
- अगस्त 2016 में, सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश यूयू ललित।
- अप्रैल 2018 में, शिमला की एक अदालत के एक न्यायाधीश।
एम्स में 200 से अधिक भ्रष्टाचार के मामलों का किया था खुलासा
एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) रहते हुए संजीव चतुर्वेदी ने भ्रष्टाचार के 200 से अधिक मामले उजागर किए थे। जिसमें करीब 80 मामलों में आरोपियों को सजा भी हुई थी। कई के खिलाफ सीबीआइ जांच भी बैठाई गई थी।
यह भी पढ़ें- आईएफएस संजीव चतुर्वेदी: डीओपीटी ने कैट में दाखिल किया शपथपत्र, पूर्व के आदेश को वापस लेने की प्रार्थना
राज्यसभा सदस्य (सांसद) जेपी नड्डा पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। एम्स में नकली दवाओं की बिक्री और इसमें बीजेपी-कांग्रेस के नेताओं की संलिप्तता को लेकर भी सवाल उठाया था।
कार्यकाल
- 2002 के आईएफएस संजीव हरियाणा कैडर के अफसर हैं।
- पहली पोस्टिंग कुरुक्षेत्र में मिली।
- संजीव चतुर्वेदी ने 1995 में मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद से बीटेक की डिग्री ली।
- 2014 में संजीव को स्वास्थ्य सचिव ने ईमानदार अधिकारी का खिताब दिया था।
- 2009 में हरियाणा के झज्जर और हिसार में वन घोटालों का पर्दाफाश किया था।
- 2007-2008 में झज्जर में एक हर्बल पार्क के निर्माण में हुए घोटाले का पर्दाफाश किया।
- 2010 में केंद्र में प्रति नियुक्ति की अर्जी दी थी।
- 2012 में उन्हें एम्स के डिप्टी डायरेक्टर का पद सौंपा गया।
- वर्तमान में नैनीताल में मुख्य वन संरक्षक के पर पर तैनात।
