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आंकड़ों का डराने वाला अनुमान! पश्चिमी हिमालय में सर्वाधिक घटेगी बर्फ, 95.9 किलो प्रति वर्ग मीटर तक होगा नुकसान

Published: Sun, 20 Sep 2026 12:47 PM (IST)

पश्चिमी हिमालय में 2100 तक वसंत ऋतु में बर्फ की मात्रा में 95.9 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर तक की कमी का अनुमान है, जिससे प्राकृतिक जल-भंडारण चक्र प्रभावित होगा।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। पश्चिमी हिमालय में बर्फ की कमी सबसे तेजी से बढ़ने का अनुमान है। नए अध्ययन के अनुसार वर्ष 2100 तक यहां वसंत ऋतु में बर्फ की मात्रा में प्रति वर्ग मीटर 95.9 किलोग्राम तक कमी हो सकती है। यह उच्च उत्सर्जन वाले परिदृश्य का अनुमान है।

कम उत्सर्जन की स्थिति में भी सदी के अंत तक वसंत की बर्फ में 32 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर कमी का अनुमान है। वर्ष 2040 तक कमी 24.2 और 2060 तक 27.4 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर रहने का अनुमान लगाया गया है।

स्नो वाटर इक्विवेलेंट

यह आकलन बर्फ के स्नो वाटर इक्विवेलेंट यानी बर्फ में मौजूद पानी की मात्रा के आधार पर किया गया है। अध्ययन में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे और बिरला इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी, मेसरा के विज्ञानी प्रोत्यूषा मुखोपाध्याय, टीपी सबिन स्वगता पायरा, अखौरी प्रमोद कृष्ण आदि ने योगदान किया। जिसे जर्नल आफ अर्थ सिस्टम साइंस में प्रकाशित किया गया।

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अध्ययन के अनुसार मध्य हिमालय, जिसमें उत्तराखंड प्रमुख रूप से शामिल है, में 2100 तक वसंत की बर्फ में 17 से 34.9 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर कमी का अनुमान है। पूर्वी हिमालय में यह कमी 5.5 से 11.1 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर रहने का अनुमान है। सर्दियों में भी पश्चिमी हिमालय में उच्च उत्सर्जन की स्थिति में बर्फ की कमी 53.2 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच सकती है।

रातें गर्म होने से पिघलने की रफ्तार बढ़ने का खतरा

अध्ययन में पश्चिमी हिमालय के लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को मध्य और पूर्वी हिमालय की तुलना में अधिक तेजी से गर्म होता पाया गया। 1901-1930 की तुलना में यहां सर्दियों का न्यूनतम तापमान अब तक 1.23 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है, जबकि अधिकतम तापमान में वृद्धि 0.87 डिग्री रही।

वसंत में न्यूनतम तापमान 1.25 डिग्री और अधिकतम तापमान 0.91 डिग्री बढ़ा। उच्च उत्सर्जन की स्थिति में 2081-2100 के दौरान पश्चिमी हिमालय की सर्दियां 7.18 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो सकती हैं। मध्य हिमालय में यह वृद्धि 6.71 और पूर्वी हिमालय में 5.82 डिग्री तक अनुमानित है।

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शोध में 1901-2020 के तापमान आंकड़ों और आठ वैश्विक जलवायु माडलों के आधार पर 2100 तक के बदलावों का आकलन किया गया। अध्ययन का संकेत है कि सर्दियों में कम बर्फ जमा होने और वसंत में तेजी से बर्फ घटने से हिमालय का प्राकृतिक जल-भंडारण चक्र प्रभावित हो सकता है।