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हिमालय पर टिकी देश की 20% अर्थव्यवस्था खतरे में, ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार 65% बढ़ी, 56 झीलें अति संवेदनशील

Published: Sun, 20 Sep 2026 12:44 PM (IST)

एक रिपोर्ट के अनुसार, हिमालयी ग्लेशियरों के 65 प्रतिशत अधिक तेजी से पिघलने के कारण देश की 20 प्रतिशत से ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (आइएमआइ) की ओर से आयोजित आनलाइन बैठक में शनिवार को सिस्टमिक की ‘प्रास्परस एंड रेजिलिएंट हिमालयाज’ रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष सामने रखे गए। सिस्टमिक जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में काम करने वाली वैश्विक संस्था है।

बैठक में हिमालयी राज्यों, पूर्वोत्तर और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े करीब 28 विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। रिपोर्ट आइएमआइ के साथ साझेदारी में तैयार की गई है और इसे राकफेलर फाउंडेशन का सहयोग मिला है। 

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भारत की 20 प्रतिशत से अधिक जीडीपी को सहारा

रिपोर्ट के अनुसार हिमालय प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भारत की 20 प्रतिशत से अधिक जीडीपी को सहारा देता है। हिमालयी राज्यों का प्रत्यक्ष आर्थिक योगदान करीब 4.5 प्रतिशत है, लेकिन हिमालयी नदियों के पानी पर मैदानी क्षेत्रों की खेती, उद्योग, जलविद्युत और अन्य आर्थिक गतिविधियां भी निर्भर हैं। इसी व्यापक निर्भरता को जोड़ने पर हिमालय से जुड़ी आर्थिक गतिविधियां देश की जीडीपी के करीब 21.5 प्रतिशत के बराबर आंकी गई हैं।

ग्लेशियरों की स्थिति रिपोर्ट की सबसे बड़ी चिंता है। हिमालयी ग्लेशियर एक दशक पहले की तुलना में 65 प्रतिशत अधिक तेजी से बर्फ खो रहे हैं। भारत में करीब 200 हिमनदीय झीलें उच्च जोखिम वाली श्रेणी में हैं, जिनमें 56 को बेहद अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।

हिमालय क्षेत्र में करीब 40 हजार ग्लेशियर

रिपोर्ट के अनुसार हिमालय क्षेत्र में करीब 40 हजार ग्लेशियर हैं, लेकिन नियमित निगरानी बहुत सीमित संख्या में हो रही है। बैठक में सिस्टमिक की निदेशक अरुषि चोपड़ा और दीप्तांशु कोत्रू ने रिपोर्ट की जानकारी दी।

आइएमआइ के अध्यक्ष रमेश नेगी (सेवानिवृत्त आइएएस), सचिव रोशन राय और कोषाध्यक्ष विनिता शाह समेत विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए। रिपोर्ट में आपदा पूर्व चेतावनी, ग्लेशियर निगरानी, ब्लैक कार्बन में कमी, मजबूत बुनियादी ढांचे और स्थानीय लोगों को अधिक लाभ देने वाले पर्यटन समेत 10 प्राथमिकताओं पर जोर दिया गया है।

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इन उपायों में निवेश से आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों को मिलाकर औसतन एक रुपये पर करीब आठ रुपये का प्रतिफल मिलने का अनुमान है। पूरी रिपोर्ट अक्टूबर में होने वाले आइएमआइ सतत पर्वतीय विकास शिखर सम्मेलन में जारी की जाएगी।