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Uttarakhand Weather: पश्चिमी विक्षोभ पड़ा धीमा, मैदान में धुंध और कोहरे से दो डिग्री तक गिर सकता है पारा

Uttarakhand Weather News उत्‍तराखंड में पहाड़ों में न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की कमी आने की संभावना है। मैदान में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 18 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर आ सकता है।

By Jagran NewsEdited By: Sunil NegiPublished: Mon, 28 Nov 2022 09:12 PM (IST)Updated: Mon, 28 Nov 2022 09:12 PM (IST)
Uttarakhand Weather: प्रदेश में आने वाले दो दिन मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।

जागरण संवाददाता, देहरादून : Uttarakhand Weather: प्रदेश में आने वाले दो दिन मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की कमी आने की संभावना है।

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पहाड़ों में पाला और मैदान में छा सकता है कोहरा

इस बीच पहाड़ों में पाला और मैदान में अधिकतर स्थानों पर कोहरा व धुंध छा सकती है। अधिकतम व न्यूनतम तापमान में 18 डिग्री सेल्सियस से अधिक का अंतर रह सकता है। तापमान का यह बड़ा अंतर स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदायक माना जाता है।

मैदान से पहाड़ तक खिली चटख धूप

सोमवार को मैदान से पहाड़ तक चटख धूप खिली रही। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग व पिथौरागढ़ की ऊंची पहाड़ियों में दोपहर दो बजे से ढाई बजे के बीच हल्के बादल छाए, हालांकि तीन बजे आसमान फिर साफ हो गया।

सुबह के समय सड़कों पर पड़ रहा है पाला

पौड़ी, नैनीताल, मुक्तेश्वर व मसूरी में सुबह के समय सड़कों पर पाला पड़ रहा है। देहरादून का अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक 26.0 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 10.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

  • मसूरी का अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 21.7 व न्यूनतम 8.9 डिग्री सेल्सियस, मुक्तेश्वर का अधिकतम 16.2 व न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री रिकार्ड किया गया।

पश्चिमी विक्षोभ फिलहाल धीमा

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ फिलहाल धीमा है। जिससे आने वाले दो दिनों में उत्तराखंड में मौसम शुष्क रहेगा। पहाड़ों में कहीं-कहीं सामान्य से अधिक पाला पड़ने और मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं कोहरा पड़ने की संभावना है।

पीछे खिसक रहे मिलम ग्लेशियर में बढ़ रहा है मलबा

बढ़ते तापमान के कारण हिमालय के ग्लेशियरों का आकार में बदलाव आ रहा है। यहां तक कि ग्लेशियर बर्फ का द्रव्यमान भी खो रहा है। वर्ष 2015 के बाद पिथौरागढ़ जनपद के मिलम ग्लेशियर के सतह पर मलबे की दर लगातार बढ़ रही है।

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