एक करोड़ का दंड, उत्तराखंड के इस कॉलेज की सभी सीटों पर रोके दाखिले
उत्तराखंड के उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज पर शिक्षकों की उपस्थिति में विसंगतियों के कारण राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग ने एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड में यूनानी चिकित्सा शिक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हरिद्वार स्थित उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड
में शैक्षणिक मानकों से जुड़ी गंभीर कमियां मिलने पर राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआइएसएम) ने एक करोड़ रुपये का दंड लगाया है।
वहीं, सत्र 2026-27 के लिए बीयूएमएस पाठ्यक्रम की सभी 60 सीटों पर प्रवेश की अनुमति रोक दी है। इससे प्रदेश के एकमात्र यूनानी मेडिकल कॉलेज में इस सत्र के नए दाखिलों पर विराम लग गया है व कॉलेज प्रबंधन के सामने शैक्षणिक मानकों को पूरा कर अगले सत्र में प्रवेश की अनुमति हासिल करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
आयोग के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की ओर से 23 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, कॉलेज का 23 व 24 जून 2026 को निरीक्षण किया गया था। इस दौरान शिक्षकों की आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (एईबीएएस) के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलीं। जांच में 20 शिक्षकों को नियमित शिक्षण संकाय के रूप में स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद प्रवेश की क्षमता में कटौती का प्रविधान लागू करते हुए सभी 60 सीटों पर दाखिले रोक दिए गए।
तकनीकी खराबी का तर्क, लेकिन नहीं मिली राहत
कॉलेज प्रबंधन ने उपस्थिति रिकॉर्ड में मिली विसंगतियों के पीछे ग्रामीण क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और बायोमेट्रिक मशीन में तकनीकी खराबी को कारण बताया। प्रबंधन ने कुछ शिक्षकों की अनुपस्थिति को स्वीकृत अवकाश से भी जोड़ा। आयोग ने कमियों पर स्पष्टीकरण मांगने के बाद एक अक्टूबर को सुनवाई का अवसर दिया।
हालांकि, रिकॉर्ड व प्रबंधन के जवाब की समीक्षा के बाद बोर्ड ने 20 शिक्षकों को नियमित शिक्षण संकाय के रूप में मान्यता नहीं दी। आयोग के आदेश के मुताबिक, प्रत्येक ऐसे शिक्षक के मामले में प्रवेश क्षमता में पांच प्रतिशत कटौती का प्रावधान लागू हुआ। 20 शिक्षकों के आधार पर कुल कटौती 100 प्रतिशत पहुंच गई और बीयूएमएस की सभी 60 सीटों पर प्रवेश की अनुमति रोक दी गई।
अगले सत्र की राह मानकों के अनुपालन पर निर्भर
कॉलेज को 31 दिसंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। सत्र 2027-28 में प्रवेश की अनुमति हासिल करने के लिए उसे निर्धारित शैक्षणिक मानकों और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
आयोग के फैसले से असंतुष्ट होने पर कॉलेज के पास अध्यक्ष के समक्ष अपील करने का विकल्प भी है। इस कार्रवाई का सीधा असर प्रदेश में यूनानी चिकित्सा शिक्षा हासिल करने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर पड़ेगा, क्योंकि सत्र 2026-27 में कॉलेज की 60 सीटों पर नए प्रवेश नहीं हो सकेंगे।
