उत्तराखंड में मेडिकल दाखिलों के लिए प्रमाणपत्र सत्यापन मॉडल में बड़ा बदलाव
उत्तराखंड मेडिकल काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने के लिए नई सत्यापन प्रणाली लागू करेगा। अब सीट आवंटन से ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। मेडिकल काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड में प्रमाणपत्रों की जांच की ऐसी व्यवस्था बनाने की तैयारी है, जिसमें फर्जी दस्तावेज के आधार पर सीट आवंटित की गुंजाइश ही न हो।
इसके लिए दूसरे राज्यों में लागू दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर मेडिकल काउंसलिंग में प्रमाणपत्र जांच व्यवस्था को स्थायी रूप से बदला जाएगा।
सत्यापन पूरा होने तक प्रवेश रहेगा प्रोविजनल
झारखंड ने फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला पकड़ में आने के मेडिकल, डेंटल और आयुष दाखिलों में दो स्तर की जांच व्यवस्था अपनाई है। पहले प्रमाणपत्र जारी करने वाले संबंधित प्राधिकरण से आनलाइन सत्यापन और इसके बाद कालेज स्तर पर मूल दस्तावेजों की भौतिक जांच की जाती है।
संदेह होने पर प्रमाणपत्र जिला स्तर पर भी जांच के लिए भेजा जाता है। सत्यापन पूरा होने तक प्रवेश को प्रोविजनल रखने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
प्रमाणपत्रों की जांच को अलग तंत्र और आनलाइन ट्रैकिंग
कर्नाटक में मूल दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बाद ही अभ्यर्थी को आगे की सीट चयन प्रक्रिया में शामिल करने की व्यवस्था है। गुजरात में निर्धारित हेल्प सेंटर पर मूल प्रमाणपत्रों के साथ दस्तावेज सत्यापन कराया जाता है।
महाराष्ट्र में आरक्षित वर्ग के जाति प्रमाणपत्रों की जांच के लिए अलग संस्थागत तंत्र और आनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था है। तमिलनाडु में भी मेडिकल दाखिले के समय मूल प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जाता है।
प्रमाणपत्र की प्राधिकरण से हो अनिवार्य रूप से पुष्टि
उत्तराखंड इन व्यवस्थाओं को मिलाकर अपना नया माडल तैयार करने की तैयारी में है, जिसमें प्रमाणपत्र अपलोड होने के बाद संबंधित तहसील, जिला या विभाग के डिजिटल रिकार्ड से उसका आनलाइन मिलान हो।
मूल प्रमाणपत्र की भौतिक जांच की जाए। संदिग्ध प्रमाणपत्र मिलने पर उसे जारी करने वाले प्राधिकरण से अनिवार्य पुष्टि कराई जाए और सत्यापन पूरा होने तक सीट को अंतिम न माना जाए।
यह भी पढ़ें- देहरादून के चार सिद्धपीठों का दर्शन कर बोले हरीश रावत, आगामी विस चुनाव में पार्टी का निर्णय सर्वोपरि
इस व्यवस्था में स्थायी निवास, जाति, आय, दिव्यांगता और विशेष श्रेणी के प्रमाणपत्रों को अलग-अलग सत्यापन प्रणाली से जोड़ने का विकल्प भी है। खासकर आरक्षित और विशेष कोटे के प्रमाणपत्रों के लिए स्वतंत्र सत्यापन तंत्र बनाया जा सकता है, ताकि काउंसलिंग प्राधिकरण केवल अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज पर निर्भर न रहे।
