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उत्तराखंड में सीज वाहनों के लिए बनेंगे विशेष इंपाउंडिंग ग्राउंड, थानों से हटेंगी जब्त गाड़ियां

Published: Mon, 02 Nov 2026 04:09 PM (IST)

उत्तराखंड में थानों से सीज वाहनों को हटाने के लिए देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में नए इंपाउंडिंग ग्राउंड बनाए जाएंगे। ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

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विकास गुसाईं, जागरण, देहरादून। थानों में सीज वाहनों की बढ़ती संख्या और जगह की कमी से जूझ रहे परिवहन विभाग ने अब इनके लिए अलग ठिकाने बनाने की तैयारी की है। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में व्हीकल इंपाउंडिंग ग्राउंड विकसित किए जाएंगे। इसके लिए करीब 14 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी गई है।

हालांकि, भूमि हस्तांतरण और विभागीय दावों के चलते तीनों स्थानों पर परियोजना की शुरुआत की राह आसान नहीं हो पा रही है। प्रदेश में इस समय यातायात और परिवहन नियमों का उल्लंघन करने पर सीज किए जाने वाले वाहनों को थानों में खड़ा किया जाता है।

लगातार बढ़ती संख्या के कारण थानों में जगह का संकट खड़ा हो गया है। कई बार पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण प्रवर्तन कर्मियों को सीज किए गए वाहन छोड़ने तक पड़ते हैं। ऐसे में इंपाउंडिंग ग्राउंड बनने से सीज वाहनों को सुरक्षित रखने के लिए स्थायी व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।

आशारोड़ी की जमीन पर अनुमति शेष

देहरादून में आशारोड़ी क्षेत्र में इंपाउंडिंग ग्राउंड के लिए भूमि चिह्नित की गई है। यह जमीन कर विभाग के नाम पर है लेकिन इसमें परिवहन विभाग, पुलिस व वन विभाग का भी दावा है। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जिलाधिकारी स्तर पर होनी है। यद्यपि, इसमें बार-बार कोई न कोई पेंच फंस रहा है।

ऋषिकेश में वन विभाग की स्वीकृति का इंतजार

ऋषिकेश में परिवहन विभाग कार्यालय से सटी भूमि को इसके लिए प्रस्तावित किया गया है। यह जमीन वन विभाग की है। इसका परिवहन विभाग को हस्तांतरण होना बाकी है। भूमि हस्तांतरण के बाद ही निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

हरिद्वार में जमीन उपलब्ध, काम शुरू होना बाकी

हरिद्वार में परिवहन विभाग के पास इंपाउंडिंग ग्राउंड के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। इसके बावजूद यहां निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। तीनों स्थानों पर परियोजना साकार होने से सीज वाहनों को रखने की समस्या दूर होगी और प्रवर्तन कार्रवाई भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

इस दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद जल्द यह कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

एसके सिंह, अपर आयुक्त, परिवहन

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