उत्तराखंड के गांवों में अब एक ही छत के नीचे मिलेंगी ये सभी सरकारी सेवाएं, बनेंगे इंटीग्रेटेड स्मार्ट विलेज सेंटर
उत्तराखंड में ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए अब ब्लॉक, तहसील या जिला मुख्यालय के ...और पढ़ें
-1791120953688_m.webp)
HighLights
ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं के लिए नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर।
सेतु आयोग ने इंटीग्रेटेड स्मार्ट विलेज सेंटर की मुहिम को दी गति।
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब अन्य गांवों में होगा विस्तार।
राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। उत्तराखंड के गांवों में अब ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए बार-बार ब्लाक, तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी सेवाओं की आसान और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सेतु (स्टेट इंस्टीट्यूट फार इंपावरिंग एंड ट्रांसफार्मिंग उत्तराखंड) आयोग ने इंटीग्रेटेड स्मार्ट विलेज सेंटर की मुहिम को गति देने की तैयारी शुरू कर दी है।
इनके माध्यम से ग्रामीणों को गांव में एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी के साथ ही उनकी सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। सेतु आयोग की पहल पर पंचायतीराज समेत अन्य रेखीय विभागों के समन्वय से तीन गांवों तिलवाड़ी (देहरादून), नकोट (चंबा) व कनवाड़ (देवीधुरा) में पायलट आधार पर इंटीग्रेटेड स्मार्ट विलेज सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
इनके जरिये सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ ही आजीविका के दृष्टिगत रोजगारपरक योजनाओं की जानकारी स्थानीय निवासियों को दी जा रही है। लोग इसमें रुचि भी ले रहे हैं। इन सकारात्मक परिणामों के बाद अब प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों में भी इस योजना को विस्तार देने का निश्चय किया गया है।
आयोग की सलाहकार भावना शिंदे के अनुसार इंटीग्रेटेड स्मार्ट विलेज सेंटर की पहल का उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाना ही नहीं, बल्कि सेवा वितरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी व सुलभ बनाना भी है। पंचायतीराज विभाग को इस मुहिम के लिए अन्य गांव चयनित करने को कहा गया है, जिस पर वह कवायद में जुटा है।
अब चयनित गांवों में इन सेंटर की मुहिम आगे बढ़ाने की योजना है। ये सेंटर ग्रामीणों के लिए सरकारी सेवाओं का एकीकृत केंद्र होंगे। यहां विभिन्न विभागों की योजनाओं, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
साथ ही ऐसी सेवाएं, जिनके लिए ग्रामीणों को वर्तमान में अलग-अलग कार्यालयों में जाना पड़ता है, उन्हें गांव में ही उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल और प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ने के साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
यह भी पढ़ें- देहरादून में पहली बार होगा 'किताब कौतिक' का भव्य आयोजन, उपलब्ध होंगी 75 प्रकाशकों की 80 हजार किताबें
यह भी पढ़ें- SIR से देहरादून में 2.97 लाख मतदाता घटे, विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गणित में बड़ा बदलाव
