उत्तराखंड में बिजली संकट: टोंस में 59 और यमुना में 49% घटा पानी, उत्पादन में मुश्किल
मानसून की विदाई के बाद उत्तराखंड की नदियों में जलप्रवाह कम होने से बिजली उत्पादन में मुश्किलें आ गई हैं, ...और पढ़ें


समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून । मानसून की विदाई से पहले वर्षा थमने का असर उत्तराखंड की नदियों के जलप्रवाह पर नजर आने लगा है। 17 सितंबर के बाद वर्षा में अचानक कमी आने से विभिन्न नदियों में जलस्राव पिछले वर्ष की तुलना में काफी घट गया है।
टोंस नदी में करीब 59 व यमुना में 49 प्रतिशत जलस्राव कम हुआ है। भागीरथी में 20 प्रतिशत तथा गंगा में पशुलोक बैराज पर करीब नौ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। नदियों के घटते प्रवाह ने विद्युत उत्पादन की चुनौती बढ़ा दी है। प्रदेश में पीक आवर्स में 350 मेगावाट बिजली की कमी के पीछे यह एक बड़ी वजह है।
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उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड उपलब्ध जल का योजनाबद्ध तरीके से उपयोग कर बिजली का उत्पादन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लक्ष्य से 36.03 मिलियन यूनिट अधिक बिजली पैदा की जा चुकी है। प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की समीक्षा के लिए प्रमुख सचिव ऊर्जा डा. आर मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में हुई बैठक में नदियों के घटते जलस्राव और बिजली उत्पादन की स्थिति की समीक्षा हुई।
यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष में अब तक निगम ने 3202.53 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया है। निगम की 61 मशीनों में से 58 मशीनें उत्पादन के लिए पूरी तरह उपलब्ध हैं और नदियों में उपलब्ध जलस्राव के अनुरूप लगातार संचालित की जा रही हैं।
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अगस्त में पिछले साल से 147.63 एमयू अधिक उत्पादन
जलस्राव में उतार-चढ़ाव के बावजूद अगस्त में यूजेवीएनएल का उत्पादन पिछले वर्ष की समान अवधि से काफी अधिक रहा। अगस्त, 2026 में विद्युतगृहों से 742.53 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि अगस्त, 2025 में यह 594.90 मिलियन यूनिट था। इस तरह इस वर्ष अगस्त में 147.63 मिलियन यूनिट अधिक उत्पादन हुआ। सितंबर में अब तक 523.92 मिलियन यूनिट बिजली बन चुकी है, जो इस अवधि के निर्धारित लक्ष्य से 21.22 मिलियन यूनिट अधिक है।
