उत्तराखंड में गहराया बिजली संकट: 350 मेगावाट की कमी से शहरों में ढाई घंटे तक कटौती
उत्तराखंड में 350 मेगावाट बिजली की कमी के कारण प्रतिदिन 2.33 मिलियन यूनिट बिजली कम मिल रही है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कटौती की जा रही है।

HighLights
उत्तराखंड में 350 मेगावाट बिजली की कमी, 2.33 मिलियन यूनिट प्रतिदिन।
जलविद्युत उत्पादन घटा, टिहरी प्लांट बंद होने से संकट गहराया।
यूपीसीएल पावर एक्सचेंज से खरीद रहा, केंद्र से अतिरिक्त आपूर्ति मांगी।
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में 350 मेगावाट विद्युत की कमी के बीच औसतन 2.33 मिलियन यूनिट बिजली प्रतिदिन कम मिल रही है। इसे बिजली कटौती से पूरा किया जा रहा है। यूपीसीएल के अनुसार मैदानी क्षेत्रों के ग्रामीण और छोटे शहरों में निर्धारित अवधि के लिए बिजली आपूर्ति रोककर व्यवस्था को सुचारू बनाया जा रहा है।
औद्योगिक आपूर्ति में स्टील फर्नेस को सबसे ज्यादा रोस्टरिंग का सामना करना पड़ रहा है। इन इकाइयों में पिछले दिनों 14 से 15 घंटे तक की रोस्टरिंग हुई, जो अब पांच से छह घंटे पर आ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में करीब तीन घंटे, वहीं बड़े शहरों में रुड़की, हल्द्वानी, काशीपुर में एक घंटे से लेकर ढाई घंटे तक की रोस्टरिंग हो रही है।
जलविद्युत उत्पादन घटने से बढ़ा दबाव
मौजूदा संकट की बड़ी वजह जलविद्युत उत्पादन में कमी है। 19 से 23 सितंबर के दौरान पीक आवर्स में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड का उत्पादन पिछले वर्ष के करीब 1094 मेगावाट से घटकर 912 मेगावाट रह गया। टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो यूनिट तकनीकी कारणों से बंद होने से भी 100 मेगावाट क्षमता उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
दस रुपये यूनिट में भी नहीं मिल रही बिजली
संकट के बीच यूपीसीएल पावर एक्सचेंज से बिजली खरीद रहा है। पीक आवर्स में बिजली की कीमत करीब 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंचने के बावजूद जरूरत के अनुरूप बिजली मिलना चुनौतीपूर्ण रहा।
पीक आवर्स में एक्सचेंज से राज्य की कुल जरूरत का केवल एक से दो प्रतिशत अतिरिक्त बिजली ही मिल पा रही है। शाम के समय ग्रिड फ्रीक्वेंसी 49.50 हर्ट्ज तक गिरने से उत्तरी क्षेत्रीय लोड डिस्पैच सेंटर ने निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेने पर भी अंकुश लगाया है।
केंद्र से अतिरिक्त बिजली मांगी
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यूपीसीएल के एमडी पीसी ध्यानी ने बताया कि संकट से निपटने के लिए पावर एक्सचेंज में लगातार बिजली खरीदी जा रही है। साथ ही केंद्र से अलग-अलग महीनों के लिए 100 से 400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग की गई है। 23 सितंबर शाम चार बजे से राज्य की एक गैस मशीन को शेड्यूल किया गया है, जिससे करीब 90 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन मिलने की संभावना है।
