उत्तराखंड में बिजली का संकट, टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां बंद...गांवों और शहरों में 15 घंटे तक कटौती
उत्तराखंड में बारिश से कोयले की आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित होने के कारण बिजली संकट गहरा गया है, जिससे ...और पढ़ें

शाम चार बजे से सुबह सात बजे तक औसतन 350 मेगावाट की कमी।

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, देहरादून। बारिश में कोयले की आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित होने से उत्तराखंड में बिजली संकट गहरा गया है। पीक आवर्स में 10 रुपये प्रति यूनिट तक कीमत देने के बावजूद पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही। शाम चार बजे से सुबह सात बजे तक औसतन 350 मेगावाट की कमी है। इससे उद्योगों, गांवों और शहरों में रोस्टरिंग करनी पड़ रही है।
यूपीसीएल के एमडी पीसी ध्यानी के अनुसार संकट की मुख्य वजह जलविद्युत उत्पादन में गिरावट है। इस अवधि में यूजेवीएनएल का पीक आवर्स का उत्पादन वर्ष 2025 के 1094 मेगावाट के मुकाबले इस वर्ष करीब 912 मेगावाट रह गया है। यानी 170-180 मेगावाट की कमी। नदियों में जल प्रवाह घटा है।
केंद्रीय स्रोतों से उपलब्धता भी पिछले वर्ष के 837 मेगावाट से घटकर करीब 715 मेगावाट रह गई है। टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद हैं। इससे पीक टाइम में 100 मेगावाट क्षमता प्रभावित है। यूनिट-5 18 जुलाई और यूनिट-6 15 सितंबर से बंद हैं।
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एक्सचेंज से मिल रही दो प्रतिशत बिजली
बारिश से कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से कोयला आधारित संयंत्रों पर दबाव है। इसका असर एक्सचेंज पर पड़ा है। यूपीसीएल के अनुसार पीक आवर्स में एक्सचेंज से कुल जरूरत की केवल एक-दो प्रतिशत अतिरिक्त बिजली मिल पा रही है। शाम को ग्रिड फ्रीक्वेंसी 49.50 हर्ट्ज तक गिरने से एनआरएलडीसी ने ओवरड्राल पर अंकुश लगाया है।
फर्नेस को 15 घंटे तक कटौती
कमी का सबसे ज्यादा असर फर्नेस पर पड़ा। 19-20 सितंबर को कुमाऊं और गढ़वाल में 14 घंटे 15 मिनट, 20-21 सितंबर को 13 घंटे 45 मिनट, 21-22 सितंबर को 15 घंटे और 22-23 सितंबर को 10 घंटे 40 मिनट की रोस्टरिंग हुई।
23-24 सितंबर की रात यह अवधि छह घंटे पांच मिनट रही। ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से पांच घंटे कटौती हुई। रुड़की, हल्द्वानी, काशीपुर, रुद्रपुर और ज्वालापुर भी प्रभावित रहे।
केंद्र से मांगी 100 से 400 मेगावाट बिजली
यूपीसीएल एक्सचेंज में लगातार बिजली खरीद रहा है। केंद्र से अलग-अलग महीनों में 100-400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मांगी गई है। 23 सितंबर शाम चार बजे से एक गैस मशीन शेड्यूल की गई है, इससे करीब 90 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है।
हाइड्रो जनरेटरों को पीक आवर्स में अधिकतम क्षमता पर चलाने और सौर ऊर्जा के दौरान तकनीकी रूप से संभव सीमा तक जलविद्युत उत्पादन घटाने के निर्देश हैं, ताकि पानी पीक मांग के दौरान बचाया जा सके। अनुरक्षण कार्य रोस्टरिंग अवधि में करने या स्थगित करने के निर्देश हैं।
