उत्तराखंड में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए नौवीं से 12वीं का धार्मिक पाठ्यक्रम तैयार, अब सरकार से ली जाएगी मंजूरी
उत्तराखंड में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए धार्मिक पाठ्यक्रम तैयार हो गया है। उप समिति ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए नौवीं से 12वीं कक्षा तक का धार्मिक पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। शनिवार को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तत्वावधान में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के पाठ्यक्रमों को अंतिम रूप दिया गया।
अब इन्हें अनुमोदन के लिए शासन को भेजा जाएगा। प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि मुस्लिम, जैन, सिख, बौद्ध एवं ईसाई समुदायों के शिक्षाविदों ने अपने-अपने विषयों से संबंधित पाठ्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया।
उप समिति के सात-सात सदस्यों की टीम ने छह धार्मिक भाषा शिक्षा पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी है। शासन से अनुमोदन मिलने के बाद इन्हें प्राधिकरण से संबद्ध अल्पसंख्यक विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लागू किया जाएगा।
छात्र धार्मिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक व विरासत को पढ़ेंगे
कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए लागू धार्मिक पाठ्यक्रम में धर्म और संस्कृति का अध्ययन कराया जाएगा। प्राधिकरण का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने के साथ उनकी धार्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक व विरासत के अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराना है।
इन विद्यालयों में मुख्यधारा की शिक्षा अन्य विद्यालयों की तरह अनिवार्य रहेगी, जबकि धार्मिक पाठ्यक्रम वैकल्पिक होगा। यह विद्यार्थी की मर्जी पर निर्भर होगा। इसे विद्यालय में पहले से आठवीं वादन से पहले या बाद में ही पढ़ाना हाेगा।
पांच समुदायों के पाठ्यक्रम पर मंथन
बैठक में मुस्लिम, जैन, सिख, बौद्ध एवं ईसाई समुदायों के शिक्षाविद शामिल हुए। उन्होंने नौवीं से 12वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रमों पर चर्चा कर उन्हें अंतिम रूप दिया। धार्मिक भाषा शिक्षा पाठ्यक्रमों को उप समिति की मंजूरी मिलने के बाद अब शासन की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
एक जुलाई से सक्रिय है प्राधिकरण
धामी सरकार ने 30 जून 2026 को मदरसा बोर्ड समाप्त कर दिया था और एक जुलाई 2026 से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने कार्य करना शुरू किया।
छह समुदायों को आधुनिक शिक्षा के लिए शिक्षा विभाग व धार्मिक पाठ्यक्रम के लिए प्राधिकरण में पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया।राज्य के 452 में से 226 बंद हो चुके हैं, 206 की मान्यता प्रक्रिया चल रही है। है, जिसमें से 35 को मान्यता मिल चुकी है।
